इस वर्ष उत्तर प्रदेश में वज्रपात (बिजली गिरने) से होने वाली मौतों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई। तकनीक के उपयोग से बिजली गिरने की पूर्व चेतावनियों को बिना समय गंवाए लोगों तक पहुंचाकर, राज्य में वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-21 में वज्रपात से मरने वाले लोगों की संख्या 35 फीसदी की कमी लाने में सफलता मिली है ।

मौसम विभाग ने किया 'नाओकास्ट' तकनीक का इस्तेमाल


रिपोर्ट के अनुसार, बिजली गिरने से होने वाली मौतों को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री द्वारा पिछले साल राहत आयुक्त कार्यालय को लोगों को इस आपदा की पूर्व सूचना देने का तंत्र विकसित करने का निर्देश दिए गए थे। आदेश मिलने के बाद राहत आयुक्त कार्यालय ने राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण से प्राप्त सुझावों के क्रम में नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर के सहयोग से इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित किया और अब बिजली गिरने की पूर्व चेतावनी देने के लिए राहत आयुक्त कार्यालय द्वारा मौसम विभाग की 'नाओकास्ट' तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक की मदद से वज्रपात होने से एक से तीन घंटे पहले तक चेतावनी जारी कर दी जाती है।

नाउकास्ट तकनीक मौसक पूर्वानुमान से जुड़ी हुई है तकनीक है, जिसके ज़रिए मौसम का हाल रियल टाइम में पता चल जाता है। इस तकनीक के ज़रिए खराब मौसम की जानकारी पहले ही लोगों तक पहुंचा दी जाती है,मौसम विभाग अभी यह अलर्ट जिला स्तर पर जारी करता है।

इस तकनीक के ज़रिए, ग्राम प्रधानों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, 35000 पुलिसकर्मीयों और किसानों तक वज्रपात की जानकारी पहुंचाई जाती है। और इन लोगों के माध्यम से वज्रपात की पूर्व चेतावनी आम जनमानस के बीच पहुंचायी जाती है।

तकनीक के इस्तेमाल में मरने वालों की संख्या में आई गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार, बिजली गिरने के कारण वर्ष 2019-20 में राज्य में 466 लोगों ने जान गंवायी थी, वहीं 2021-22 में वज्रपात से अब तक 181 मौतें हो चुकी हैं। पिछले साल इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम के इस्तेमाल से 2020-21 में वज्रपात से होने वाली मौतों की संख्या घटकर 303 थी।

इनपुट- दैनिक जागरण