बनारस की सुप्रसिद्ध मिर्च को जीआई टैग मिलने के बाद, अब ODOP (वन डिस्ट्रिक्ट एंड वन प्रोडक्ट) में शामिल करके एक नई पहचान दी गई है। संगठित क्षेत्र में मिर्च का उत्पादन कर रहे हजारों लोगों को बाजार से जोड़ने के लिए बनारसी मिर्च से बनने वाले 35 से अधिक उत्पादों के लिए वाराणसी में मिर्च के खेतों के पास ही 300 फूड प्रॉसेसिंग यूनिट लगाई जाएंगी।

वाराणसी में हर साल होता है 900 मीट्रिक टन मिर्च का उत्पादन

रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी में हर साल 900 मीट्रिक टन मिर्च का उत्पादन होता है। यह राजतालाब, काशी विद्यापीठ और सेवापुरी ब्लॉक में 300 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।

इस कार्यक्रम के नोडल अधिकारी और जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त ने बताया कि मिर्च से चिली पाउडर, चिली फ्लैक्स और चिली सॉस तैयार करने के लिए वाराणसी में 230 फूड प्रॉसेसिंग यूनिट का कायाकल्प किया जाएगा और 70 नए यूनिट खोले जाएंगे। इस कारोबार को शुरू करने वाले उद्यमी वाराणसी के जिला उद्यान कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं, उद्यमियों को सरकार इस काम के लिए सब्सिडी देगी।

बनारसी मिर्च ने गल्फ देशों में भी बनाई पहचान

भारत सहित गल्फ देशों में भी बनारसी मिर्च और इससे बनने वाले मसालों और अचार की भी बड़े स्तर पर मांग रहती है। इसे देखते हुए सरकार ने अब बनारस के मिर्च बाजार को संगठित सेक्टर में लेकर आने का फैसला किया है। इस कदम से मिर्च के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है।

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