मुख्य बिंदु:
  • उत्तर प्रदेश में लगभग छह महीने के अंतराल के बाद बुधवार को फिर से खुले प्राथमिक विद्यालय।
  • स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम रही।
  • दो शिफ्ट में चलेंगी बच्चों की कक्षाएं।
  • बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों का किया जाएगा थर्मल स्कैन।
  • सभी के लिए मास्क पहनना और कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना होगा अनिवार्य।
  • अभिभावक अभी भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।

कोविड-19 प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए, उत्तर प्रदेश में प्राथमिक विद्यालय लगभग छह महीने के अंतराल के बाद बुधवार को फिर से खुल गए। बच्चों को सुबह 8 बजे से 11 बजे तक और 11:30 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक 3-3 घंटे की दो शिफ्ट में पढ़ाया जाएगा।

स्कूल परिसर में प्रवेश करने से पहले बच्चों, शिक्षकों और कर्मचारियों का थर्मल स्कैन किया जाएगा। सभी के लिए मास्क पहनना अनिवार्य है और सभी स्कूलों को नियमित रूप से सैनिटाइजे किया जाएग। इसके अलावा, सरकारी स्कूलों में, बच्चों से अपने बर्तन और पानी की बोतलें ले जाने का अनुरोध किया गया है।

1 सितंबर से सभी बच्चों के लिए कक्षाएं हुई फिर से शुरू


पहले मार्च '21 में, कुछ दिनों के लिए स्कूल फिर से खोले गए थे, लेकिन कोविड मामलों में अचानक वृद्धि के कारण, उन्हें फिर से बंद कर दिया गया था। यूपी सरकार पहले ही कक्षा 9 से 12 के लिए 16 अगस्त से और कक्षा 6 से 8 के लिए 23 अगस्त से स्कूल खोल चुकी है। कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन करते हुए, मदरसों में कक्षाएं भी 1 सितंबर से शुरू हुईं। स्कूलों में बच्चों का चॉकलेट, टॉफी और फूलों से स्वागत किया, हालांकि उपस्थिति अपेक्षाकृत कम थी।

अभिभावकों अभी भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं

सरकार के फैसले के बावजूद, माता-पिता अभी भी अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए संशय में हैं, और अपने घरों के सुरक्षित स्थान पर ऑनलाइन कक्षाओं के लिए जोर दे रहे हैं। कुछ लोगों का यह भी मानना ​​है कि जब वे एक-दूसरे के पास खेल रहे होते हैं तो बच्चों पर नज़र रखना मुश्किल होता है और जैसे ही शिक्षक नज़रों से ओझल हो जाते हैं, वे अपने मास्क हटा सकते हैं। महामारी की संभावित तीसरी लहर और बुखार के बढ़ते खतरे के आलोक में, कई माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजने का फैसला कर रहे हैं।

-इनपुट: आईएएनएस