उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अनाथ हुए बच्चों का अब उत्तर प्रदेश सरकार ख्याल रखेगी। उत्तर प्रदेश सरकार ने महामारी की दूसरी लहर में बेसहारा हुए बच्चों के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश सरकार ने निराश्रित बच्चों के लालन-पालन, रहने, शिक्षा समेत अन्य सुविधाएं देने के लिए 'उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना' की घोषणा की है। ऐसे बच्चो की देखभाल करने वालों को सरकार 4,000 रुपये प्रतिमाह देगी।

स्कूल या कॉलेज में या व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों को निःशुल्क लैपटॉप और टैबलेट दिया जाएगा। बच्चियों की शादी के लिए भी 1 लाख 1 हजार रुपये की धनराशि दी जाएगी। 'उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना' में ऐसे बच्चों के पालन-पोषण और रहने के साथ ही बड़े होने पर शिक्षा और शादी की भी व्यवस्था की गई है। इस योजना का कार्यान्वयन महिला कल्याण विभाग द्वारा किया जाएगा।

इन बच्चों को मिलेगा योजना का लाभ


इस योजना का लाभ सिर्फ उन बच्चों को दिया जाएगा, जिनके माता-पिता या दोनों में से किसी एक कमाऊ सदस्य की मौत 1 मार्च 2020 के बाद कोरोना संक्रमण के चलते हुई है। माता-पिता में से किसी एक की मौत के बाद दूसरे की वार्षिक आय 2 लाख रुपये से काम है तो भी उसे इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही 10 साल से कम आयु के निराश्रित बच्चों की देखभाल प्रदेश व केंद्र सरकार के मथुरा, लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, रामपुर के बालगृहों में की जाएगी। इसके साथ ही अवयस्क बच्चियों की देखभाल और पढ़ाई के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में रखा जाएगा। 18 अटल आवासीय विद्यालयों में भी उनका दाखिला होगा। राज्य से लेकर जिला स्तर पर जिला प्रोबेशन अधिकारी के नियंत्रण में बनी समितियां जैसे बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई और ग्रामीण इलाकों में निगरानी समितियों को इसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी जाएगी।