नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) की नींव आज प्रधानमंत्री ने रखी और यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा जिसका निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा। नोएडा इंटरनेश्नल एयरपोर्ट के साथ ही यूपी देश का एकमात्र ऐसा राज्य बन जाएगा जहां पांच इंटरनेश्नल एयरपोर्ट हैं।

इसके साथ ही दिल्ली देश का पहले शहर बन जाएगा, जहां 70 किलोमीटर की रेंज में अब तीन एयरपोर्ट होंगे। इनमें से भी दो इंटरनेशनल एयरपोर्ट होंगे। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के अलावा तीसरा एयरपोर्ट गाजियाबाद का हिंडन एयरपोर्ट है, जहां से घरेलु उड़ान संचालित होती है।

जानिये एयरपोर्ट की खासियत

जेवर एयरपोर्ट के निर्माण में करीब 29.6 हजार करोड़ रुपए की लागत आएगी और यह 5845 हेक्टेयर जमीन पर बनाया जाएगा, जिसमें कुल 5 रनवे होंगे।

ऐसा कहा जा रहा है कि सितंबर 2024 तक एयरपोर्ट पूरी तरह से ऑपरेशनल होगा।

जेवर एयरपोर्ट पर एक साथ 178 विमान खड़े हो सकेंगे और एयर ट्रैफिक बढ़ने पर अधिक रनवे बनाए जा सकते हैं।

जेवर एयरपोर्ट पर पहले साल 40 लाख यात्रियों की आवाजाही का अनुमान है और 2025-26 में यात्रियों की संख्या 70 लाख तक हो सकती है।

इसी के साथ यह उम्मीद लगाई जा रही है कि साल-दर-साल यात्रियों की संख्या दोगुने के हिसाब से बढ़ने की उम्मीद है और 2044 तक यात्रियों की संख्या करीब 8 करोड़ होने की उम्मीद है।

जेवर एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी तीन बड़े एक्सप्रेसवे से भी है, जिनमें यमुना एक्सप्रेसवे, बुलंदशहर जेवर हाईवे और पेरिफेरल एक्सप्रेसवे।

एयरपोर्ट से डोमेस्टिक उड़ानों में 40 फीसदी मांग मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसी मेट्रो सिटी में आने-जाने वाले यात्रियों की है।

जेवर एयरपोर्ट से 8 डोमेस्टिक और 1 इंटरनेशनल फ्लाइट शुरू की जाएगी, जबकि दिल्ली एयरपोर्ट की क्षमता पूरी होते ही यहां से 27-27 डोमेस्टिक-इंटरनेशनल फ्लाइट्स भी शुरू हो जाएंगी।

यह एयरपोर्ट साल 2030 तक पूरी तरह इंटरनेशनल आकार ले पाएगा और एयरपोर्ट से शुरुआत में 8 घरेलु उड़ाने शुरू की जाएंगी।

 

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