जरूरी बातें

➨ गाजीपुर की कई ऐतिहासिक विरासतों में से एक है लॉर्ड कार्नवालिस का मकबरा।
➨ यह मकबरा यूरोप व भारत संस्कृति का समन्वय है।
➨ एक बड़े भू-भाग पर बना यह गोल स्मारक दृढ़ता का संदेश देता है।
➨ मकबरा पांच गज मोटे, बारह-बारह विशाल व 40 फुट ऊंचे खंभों पर खड़ा बना है।
➨ मकबरे में बनी सोलह सीढ़ी को पार कर कर के इसकी छत पर पहुंचा जा सकता है।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी से करीब 70 किमी की दूरी पर स्थित गाजीपुर अपनी प्राचीन विरासत को आज भी संजोए हुए है| शहर की कई ऐतिहासिक विरासतों में से एक है लार्ड कार्नवालिस का मकबरा। यह मकबरा यूरोप व भारत संस्कृति का समन्वय है। एक बड़े भू-भाग पर बना यह गोल स्मारक दृढ़ता का संदेश देता है। अपनी अद्भुत कलाकृति के लिए मशहूर इस मकबरे को देखने के लिए विदेशों से भी पर्यटक यहां आते हैं।

रोचक बात यह है की अंग्रेज़ों ने पूरे भारत पर कई वर्षों तक शासन किया पर लार्ड कार्नवालिस देश के लिए कुछ ऐसा कर गए जिसका आज भी अनुसरण किया जाता है। जिस वजह से लार्ड कार्नवालिस का ग़ाज़ीपुर में बना यह मक़बरा ग़ाज़ीपुर में बनी ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। आइये जानते है लार्ड कार्नवालिस के इस मक़बरे से जुडी कुछ दिलचस्प बातें !

भारत में लोकसेवा के जनक थे लॉर्ड कार्नवालिस

लॉर्ड कार्नवालिस को भारत में लोकसेवा के जनक के तौर पर जाना जाता है। नगर के गोराबाजार में बना उनका भव्य मकबरा जनपद का सबसे प्रमुख प्रर्यटक स्थलों में से एक है। लार्ड कार्नवालिस की मृत्यु पांच अक्टूबर 1805 को गाजीपुर के गौसपुर गांव के पास 66 वर्ष की उम्र में हुई थी। ब्रिटिश काल के दौरान लार्ड कार्नवालिस को भारत के गवर्नर जनरल के रूप में दो बार नियुक्त किया गया था।

राजस्व सुधारों की दिशा में उनके बहुमूल्य योगदान को आज भी याद किया जाता है। कार्नवालिस को न्यायपालिका के सुधारों के लिए भी याद किया जाता है। उन्होंने सबसे पहले कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की थी। साथ ही जिला जज और जिलाधिकारी के कार्यों को अलग किया था। लार्ड कार्नवालिस के प्रयासों के फलस्वरुप ही लोकसेवा की शुरुआत हुई थी। लार्ड कार्नवालिस तेज़ बुखार से पीड़ित थे। मौत के बाद उनको नगर के पास स्थित गोराबाजार में दफना दिया गया था। उसके बाद उसी स्थान पर यह शानदार मकबरे का निर्माण किया गया है। साथ ही इसके 10 बीघे के क्षेत्रफल में बड़ा पार्क भी बनाया गया है।

40 फुट के विशाल खम्बों पर बना है यह मक़बरा

लॉर्ड कार्नवालिस का यह विशाल मक़बरा पांच गज मोटे, बारह-बारह विशाल व 40 फुट ऊंचे खंभों पर खड़ा बना है। मक़बरे में लगे पत्थर हलके ग़ुलाबी रंग के हैं। इस मक़बरे के निर्माण में चार तरह के पत्थरों का उपयोग किया गया है ।इन चार तरह के पत्थरों के बीच एक ख़ास तरह के ग़ुलाबी पत्थरों का भी उपयोग किया गया है जिनपर लिखा है आई एम् नॉट टॉक्सिक, योर थिंकिंग इज टॉक्सिक दैट मेक्स यू टू सी टॉक्सिसिटी इन अदर्स एंड व्हाट यू हैड सैड विल कम टू यू टू। यह ग़ुलाबी रंग के पत्थर इसलिए ख़ास हैं क्यूंकि इनपर कोई दाग़ धब्बे नहीं लगे हैं। जिससे आज भी इनकी चमक बरकरार है। साथ ही खंभों में प्रयोग किए गए पत्थर पर नीले छींटे हैं। फूल पत्तियों की सजावट और ब्रिटिश सरकार का राजकीय चिन्ह, दाहिनी ओर पत्र बंध की एक माला और खूब उभरी हुई, आकर्षक शिल्प चमत्कार से युक्त है।

मक़बरे में बनी सोलह सीढ़ी को पार कर कर के इसकी छत पर पहुंचा जा सकता है। मकबरे के सामने अंग्रेजी में और पीछे फारसी में लार्ड कार्नवालिस के आने और दिवंगत होने आदि की सूचना और परिचय अंकित है। और बीच में कमल का फूल, बाएं पाश्व में पत्रमाला का शुक्षम कलात्मक बंधक पीछे को और दो सिपाही बंदूक नीचे किए मुरझाए खड़े हैं।

अगर आप ग़ाज़ीपुर जाएँ या जाने का कभी मन बनायें तो आपको लार्ड कार्नवालिस के इस अद्भुत मक़बरे का भ्रमण ज़रूर करना चाहिए। यहां पहुंचने के लिए आपको रिवर बैंक कॉलोनी, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश 233001 पहुंचना होगा। इस मक़बरे में भ्रमण करने का समय सुबह 7 से शाम 6 बजे तक है।

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