किसी भी देश में विकास का पहिया उच्च गुणवत्ता की सड़कों पर ही तेजी से दौड़ सकता है। सड़कें, राजमार्ग, एक्सप्रेस-वे जितने ज्यादा होंगे उतनी ही बेहतर कनेक्टिविटी होगी। बेहतर कनेक्टिविटी से कारोबार बढ़ेगा और जनता को भी इससे आने जाने में आसानी होगी। लेकिन कनेक्टिविटी तब ही हो सकती है जब देश की सड़कों की गुणवत्ता उच्चस्तरीय होगी जिससे सड़कों पर चलने वाले वाहन सुरक्षित हो और तेज रफ्तार भर सकें।


इसी मकसद से अब सड़कों की गुणवत्ता के सुधार में आईआईटी बीएचयू अहम भूमिका निभाएगा। इसके लिए आईआईटी बीएचयू में जल्द ही सड़क अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना होगी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान काशी हिंदू विश्वविद्यालय (IIT BHU) और जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड (GRIL) ने सड़कों की गुणवत्ता के सुधार के लिए सड़क अनुसंधान प्रयोगशाला स्थापना के लिए ऑनलाइन मोड के माध्यम से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन पर आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन और विनोद कुमार अग्रवाल अध्यक्ष जीआरआईएल द्वारा हस्ताक्षर किए गए।


केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस उपलब्धि पर आईआईटी (बीएचयू) और ग्रिल को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता को और अधिक सुधारा जाए, साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी मदद मिले। सॉलिड वेस्ट मैटैरियल का सड़क निर्माण में उपयोग बेहद महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आईआईटी के शोधकर्ताओं का आह्वान किया कि सड़क और पुलों के निर्माण में स्टील और सीमेंट का उपयोग कम करने के लिए शोध आवश्यक है।

समझौता ज्ञापन 5 साल की अवधि के लिए लागू रहेगा।


आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. प्रमोद कुमार जैन ने इस उपलब्धि पर बताया कि यह समझौता 5 साल के लिए लागू रहेगा। संस्थान के शिक्षाविद और देश के अन्य एक्सपर्ट राजमार्ग सुरक्षा विकास परियोजना के तहत सड़क सुरक्षा, पर्यावरण और सामाजिक प्रभावों से संबंधित अध्ययन करेंगे। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य देश में टिकाउ और पर्यावरण के अनुकूल सड़कों के निर्माण के प्रति रिसर्च रहेगा। इस एमओयू का मुख्य उद्देश्य देश में टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल सड़कों के निर्माण के प्रति रिसर्च रहेगा। इसमें बिटुमिनस (डामरी) मिक्स (bituminous (asphalt) mix ) की रिसाइक्लिंग, भारतीय सड़कों के लिए मैकेनिस्टिक फुटपाथ डिजाइन और सॉलिड वेस्ट मैटेरियल्स से पेवमेंट बनाने पर शोध, बिटुमिनस मिक्स के लिए पर्फामेंस बेस्ड मिक्स डिजाइन का विकास करना प्रमुख लक्ष्य रहेगा। उन्होंने बताया इस प्रोजेक्ट को संस्थान में लाने में सिविल इंजीनियरिंग के अस्सिटेंट प्रोफेसर डॉ निखिल साबू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।