यूपी में नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए साइबर सेल में तैनात पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में हर साल साइबर क्राइम से जुड़े 11000 से अधिक मामले दर्ज किए जा रहें हैं, ऐसी स्थिति में यह कदम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। इस पहल की शुरूआत आगरा में हो चुकी है, जिसमें 862 पुलिसकर्मियों को ट्रेनिंग दी गई। अब इसी तर्ज पर यूपी के सभी 16 ज़ोन में साइबर जागरुकता कैंपेन चलाया जाएगा, जिससे पुलिस को साइबर क्राइम से निपटने के लिए ट्रेनिंग मिल सके।

आगरा में 862 पुलिस कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण


इस जागरुकता अभियान के तहत, आगरा ज़ोन में 12 सेशनों में साइबर क्राइम के विभिन्न विषयों (एटीएम क्लोनिंग, फिशिंग, मालवेयर, पोर्नोग्राफी आदि) पर पुलिस कर्मियों को जानकारी दी गई। इसमें 862 पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित किया गया था। अब ऐसे ही प्रदेश के हर जोन में पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

डीजीपी ने एक बयान में कहा कि, "मोबाइल और कंप्यूटर के बढ़ते उपयोग के कारण बढ़ रहे साइबर अपराधों से बचने के लिए जनता को जागरूक करने की जरूरत है। इसके लिए 'रोकथाम, इलाज से बेहतर है' के सिद्धान्त पर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जनता को साइबर अपराधों से बचाव की पर्याप्त जानकारी नहीं है। साइबर क्राइम की कोई सीमा नहीं है। साइबर अपराधी बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को टारगेट कर रहे हैं"।

नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 50 हजार शिकायतें

यूपी में हर साल करीब 11 हजार मुकदमें दर्ज हो रहे हैं। वहीं नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 50 हजार शिकायतें दर्ज हो रही हैं। इन शिकायतों में हर साल बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रदेश में वर्ष 2019 में 10,341, वर्ष 2020 में 11,772 और वर्ष 2021 में अब तक 5,077 साइबर अपराध की एफआईआर दर्ज हुई हैं। प्रदेश में 2020 में 16 रेंज में बने साइबर थानों में 256 साइबर अपराध की एफआईआर दर्ज की गईं। जिसके आधार पर पुलिस टीम ने 400 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया।

अब उम्मीद है कि इस अभियान के ज़रिए, साइबर सेल के पुलिस कर्मी इस गंभीर अपराध से निपटने में सक्षम होंगे और नागरिकों को कुछ राहत मिलेगी