ज़रूरी बातें

सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत उपस्थिति को लागू किया गया।

संक्रमित कर्मचारियों को वेतन सहित सात दिन का अवकाश दिया जाएगा।

सभी कार्यालयों में कोविड हेल्प डेस्क की स्थापना और बिना स्क्रीनिंग के प्रवेश वर्जित।

विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए शत-प्रतिशत टीकाकरण के प्रयास किए जाएं।

 

कोविड के बढ़ते मामलों के बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को 50 प्रतिशत तक सीमित कर दिया। सोमवार को मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने बढ़ते कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए अधिकारियों को सरकारी और निजी दोनों कार्यालयों में आवश्यक सेवा विभागों को छोड़कर कर्मचारियों की 50 प्रतिशत उपस्थिति को लागू करने और घर से काम करने को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया है।”

समस्त सरकारी एवं निजी कार्यालय 50 प्रतिशत क्षमता पर कार्य करेंगे

मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि किसी निजी कार्यालय से कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित पाया जाता है तो उसे वेतन सहित सात दिन का अवकाश दिया जाए और सभी कार्यालयों में कोविड हेल्प डेस्क स्थापित किया जाए और किसी को भी बिना स्क्रीनिंग के प्रवेश नहीं दिया जाए।

बस स्टेशनों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों पर आवश्यक रूप से कोरोना टेस्टिंग की जानी चाहिए और पॉजिटिव पाए वाले और किसी भी लक्षण को प्रदर्शित करने वाले व्यक्तियों को संस्थागत आइसोलेशन के लिए भेजा जाना चाहिए।

हालांकि, टीकाकरण फिर से वायरस से लड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है और आने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने अधिकारियों को चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार डिस्ट्रिक्ट वाइज योजना बनाने का निर्देश दिया है ताकि पहली खुराक की 100 प्रतिशत पूर्णता सुनिश्चित की जा सके। उनमें से प्रत्येक में मतदान से कम से कम 10 दिन पहले टीकाकरण पूर्ण हो जाना चाहिए। वर्तमान में राज्य में कोरोनावायरस के कुल 33,946 सक्रिय मामले हैं, जिनमें से 33,563 होम आइसोलेशन में हैं।

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