उत्तर प्रदेश सरकार ने 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट" योजना को शुरू करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत जिलों के स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल मार्ग अपनाने का फैसला किया गया है। इस पहल को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए एक नई समर्पित ई-कॉमर्स वेबसाइट का काम चल रहा है। कथित तौर पर, उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से प्रत्येक में स्थानीय उत्पादों की समग्र बिक्री को बढ़ावा देने के लिए इस कार्यक्रम में कम से कम एक प्रमुख उत्पाद लिस्ट किया गया है।

स्थानीय हस्तशिल्प को जल्द मिलेगी अंतरराष्ट्रीय ख्याति


'वोकल फॉर लोकल' की तर्ज पर उत्तर प्रदेश राज्य एक ई-कॉमर्स पोर्टल लॉन्च करने का लक्ष्य बना रहा है, जो एक बार लॉन्च होने के बाद "अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट जैसी वेबसाइटों को कम्पटीशन देगा"। वेबसाइट इन स्थानीय हस्तशिल्पों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करेगी।

"कोई भी व्यक्ति जो जीएसटी के साथ रजिस्टर्ड है, वेबसाइट पर अपना उत्पाद बेच सकता है। जो कारीगर रजिस्टर्ड नहीं हैं उन्हें भी सब-वेंडर के रूप में प्लेटफॉर्म पर शामिल किया जा सकता है। बिक्री के समय, विक्रेता को एक सीधा मैसेज भेजा जाएगा और उत्पाद को तैयार रखने के लिए विक्रेता को बताने के लिए एक हेल्पलाइन के माध्यम से कॉल किया जाएगा। लॉजिस्टिक्स पार्टनर उत्पाद को उठाएगा और डिलीवर करेगा।

नया ओडीओपी मार्ट भी स्थापित किया जाएगा

एडिशनल मुख्य सचिव, एमएसएमई, नवनीत सहगल के अनुसार, यूपी हस्तशिल्प विकास और विपणन निगम ने एक ओडीओपी मार्ट भी स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस नए प्रावधान से उन सभी कारीगरों को फायदा होगा जिनके पास जीएसटी रजिस्ट्रेशन नहीं है।

राज्य का यह समर्थन मार्ट से खरीदे गए उत्पादों की गुणवत्ता और प्रामाणिकता के आश्वासन को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, "ओडीओपी उत्पादों की मुफ्त सूची तैयार की जा रही है और जल्द ही एक ओडीओपी मार्ट एप भी शुरू किया जाएगा।"

नई वेबसाइट विकास का वादा करती है

पिछले ढाई साल में फ्लिपकार्ट और एमेजॉन जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर 15 कैटेगरी के तहत करीब 11,000 ओडीओपी आइटम बेचे गए हैं। इन साइटों पर 355 से अधिक कलाकारों और कारीगरों ने रजिस्टर्ड कराया है और ₹24 करोड़ से अधिक की कमाई की है। इस प्रकार, इन कलाकारों के लिए एक समर्पित वेबसाइट, कलाकारों के साथ-साथ राज्य को भी अच्छा रेवेन्यू दिलाने के लिए तैयार है।