'अहं संस्कृतं वदामि'- क्या आपको इसका अनुवाद करने के लिए गूगल की मदद की जरूरत है, जिसका सीधा सा मतलब है- 'मैं संस्कृत बोलता हूं'? फिर सोचिए क्या करते होंगे वो जज, जिनके सामने 'आचार्य श्याम उपाध्याय' (Acharya Shyam Upadhyay) अपने मुकदमों की पैरवी संस्कृत भाषा में करते हैं। ऐसा करने वाले भारत के एकमात्र वकील के रूप में पहचाने जाने वाले, 'आचार्य श्याम उपाध्याय जी' (Acharya Shyam Upadhyay) को मानव संसाधन और विकास मंत्रालय द्वारा 2003 में 'संस्कृत मित्रम' ('Sanskrit Mitram') पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। हमारे हिसाब से इस प्राचीन भाषा को आज के युग में जीवित रखने के उनके प्रयास अत्यंत सराहनीय हैं और यदि आप भी इस सोच से सहमत हैं तो संस्कृत भाषा से उनके लगाव के बारे में अधिक जानने के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

अविश्वसनीय भाषा और माथे पर सुशोभित तिलक


उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के रहने वाले आचार्य श्याम उपाध्याय को यह जानकर अजीब लगा कि भारतीय अदालतें संस्कृत को आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल नहीं करती हैं। इस प्रकार, अपने स्कूल जाने के वर्षों के दौरान, उन्होंने कानून सीखने और संस्कृत में इसका अभ्यास करने की कसम खाई। इस कारण से, उन्होंने बौद्ध दर्शन में आचार्य (पुजारियों के लिए एक पद) प्राप्त किया और बाद में हरिश्चंद्र कॉलेज से बीए एलएलबी की डिग्री हासिल की।


आज उनकी बचपन की आकांक्षाओं ने एक प्रेरणादायक और अनूठी कहानी का रूप ले लिया है। संस्कृत में उनके अविश्वसनीय प्रवाह के अलावा, उन्हें त्रिपुंड और तिलक द्वारा पहचाना जाता है जो उनके चेहरे को सुशोभित करते हैं। आचार्य उपाध्याय की एक और मंत्रमुग्ध कर देने वाली उपलब्धि, जो उन्हें आम आदमी से अलग करती है, वह यह है कि उन्होंने संस्कृत में लगभग 60 उपन्यास लिखे हैं! वर्तमान दौर में संस्कृत भाषा को फिर से लोगों के बीच आम बोलचाल की भाषा बनाने के लिए उनकी मुहिम जारी है। इसके लिए आचार्य श्याम उपाध्याय 42 वर्षों से प्रयासरत हैं। इसी का नतीजा है कि वह कोर्ट रूम से लेकर बेडरूम तक सिर्फ और सिर्फ संस्कृत भाषा का ही इस्तेमाल करते हैं।

नॉक नॉक

आप संस्कृत को समझते हैं या नहीं, अपने स्कूल के वर्षों के दौरान इसके साथ आपके संक्षिप्त परिचय ने आपको भारतीय संस्कृति के सम्बन्ध में इस भाषा के महत्व से अवगत कराया होगा। हम आशा करते हैं कि आचार्य श्याम उपाध्याय की कहानी आपको उन मूल बातों को समझने के लिए प्रेरित करेगी ताकि आप इस भाषा को विलुप्त होने के कगार से बचाया जा सके!

इनपुट - सुगंधा पांडेय

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