उत्तर प्रदेश में चिकित्सा के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए, यहां के सभी जिलों को अब 24×7 एम्बुलेंस सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी। कोरोना वायरस की 'तीसरी लहर' के संभावित बढ़ने से पहले राज्य में एक बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन सेवाओं के प्रतिक्रिया समय (रिस्पांस टाइम) में सुधार लाने के आदेश भी दिए गए हैं।

कोरोना से संक्रमित बच्चों के लिए प्राथमिक चिकित्सा से लैस होगी एम्बुलेंस सेवा


शुक्रवार को एक कोविड समीक्षा बैठक में, मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को वर्तमान में संवेदनशील स्वास्थ्य स्थिति के मद्देनजर एम्बुलेंस सेवाओं सहित सभी चिकित्सा व्यवस्थाओं पर निरंतर नजर रखने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि "अगर एम्बुलेंस की अनुपलब्धता के कारण अचानक मौत की कोई घटना होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी परिस्थिति में, रोगी या उनके परिवारों को पीड़ित नहीं होना चाहिए।"

इन वाहनों में रोगियों के उपचार के लिए आवश्यक जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध होना आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, तीसरी लहर से बच्चे अधिक प्रभावित हो सकते हैं, जिसके लिए एम्बुलेंस में वह सभी सुविधाएं होनी चाहिए, जिसकी आवश्यक्ता बच्चों को पड़ सकती है।

बच्चों के अस्पताल पहुंचने तक जरूरी प्राथमिक उपचार, अत्यावश्यक या गंभीर स्थिति में, सभी उपकरणों का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके अलावा, एम्बुलेंस कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है ताकि वे कोविड रोगी के परिवार के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपना सकें।