महामारी की दूसरी लहर को नियंत्रित करने के लिए यूपी सरकार राज्य के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में एक सीरो सर्वेक्षण करने के लिए तैयार है। यह सर्वे 4 जून से शुरू होगा और महीने के अंत तक फाइनल रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, यह सर्वेक्षण लखनऊ और यूपी के अन्य जिलों में किया जा रहा है और इसमें उन एसिम्पटोमेटिक रोगियों (Asymptomatic patients) का भी ध्यान रखा जाएगा, जिन्होंने आरटी-पीसीआर टेस्ट नहीं करवाया था।

सीरो सर्वेक्षण के निष्कर्ष जून के अंत तक साझा किए जाएंगे

उत्तर प्रदेश सरकार ने महामारी के व्यापक्ता को समझने के लिए राज्य भर में एक सीरो सर्वेक्षण करने का निर्णय लिया है। शीर्ष अधिकारियों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को 4 जून से नमूने एकत्र करना शुरू करने और लखनऊ और यूपी के अन्य जिलों में रहने वाले लोगों में विकसित प्रतिरक्षा (immunity) की मात्रा का पता लगाने का निर्देश दिया गया है।

सेरो सर्वेक्षण में रक्त नमूने लेकर जांच की जाती है और रक्त में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी का पता लगाया जाता है, जिससे कोरोना वायरस से निपटने में मदद मिलती है। इस सर्वे के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि किस जिले के किस क्षेत्र में कोरोना का कितना संक्रमण फैला और आबादी का कितना हिस्सा संक्रमित हुआ। इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष जून के अंत तक जारी किए जाएंगे।

क्या है सीरो सर्वेक्षण?

जब कोई बाहरी इंफेक्शन (infection) या पैथोजेन (pathogen) हमला करता है, तो मानव शरीर इसके खिलाफ एक सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (protective immune response) से लड़ता है जो इम्युनोग्लोबुलिन (IG) नामक एंटीबॉडी का उत्पादन करती है। सीरो सर्वेक्षण करते समय, चिकित्सा कर्मी कोविड के खिलाफ इम्युनोग्लोबुलिन जी (IGG) की तलाश करेंगे और इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किन लोगों में वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित हुई है।

कैसे फायदेमंद होगा यह सीरो सर्वे?

यह बताया गया है कि ऐसे कई व्यक्ति हैं जो एसिम्पटोमेटिक रहे हैं या अभी भी हैं और उन्होंने आरटी-पीसीआर टेस्ट नहीं करवाया है। पूरे यूपी में आगामी सीरो सर्वेक्षण एसिम्पटोमेटिक को ध्यान में रखते हुए महामारी की व्यापक्ता की समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

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