उत्तर प्रदेश सरकार की एक पहल के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ‘बिजली सखियों’ के रूप में शामिल करने का निर्णय काफी अच्छा साबित हुआ है। यह पहल ‘राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ (National Rural Livelihood Mission) के तहत शुरू की गयी है और इन महिला समूहों ने प्रयागराज जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 49 लाख रुपये मूल्य के बिजली बिलों की वसूली में प्रशासन की मदद की है। रिपोर्ट के अनुसार, ये बकाया बिल 1 फरवरी से 15 जून, 2021 के बीच अर्जित किए गए हैं।

बिजली सखी ने लॉकडाउन में 2.5 लाख का कमीशन कमाया

उत्तर प्रदेश की ‘बिजली सखियों’ ने दो तरफा अभियान चलाते हुए सोरांव, कोरांव, फूलपुर, मेजा, करछना, मौआइमा और प्रतापपुर के ग्रामीण इलाकों में बिजली विभाग के बिलों के भुगतान की सुविधा प्रदान करते हुए महिला सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण बयान दिया।

लगभग 102 महिलाओं को 10 समूहों में विभाजित करके, सखी बल का गठन किया गया, जो स्वतंत्र रूप से 5,274 उपभोक्ताओं से बिजली का बकाया वसूलने में सफल रहा। उन्होंने केवल 5 महीनों में 49 लाख रुपये के बिल वसूल कर बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी आश्चर्यचकित कर दिया। इसके साथ, महामारी के बीच स्वयं सहायता समूह अपने लिए 2.5 लाख का कमीशन अर्जित करने में सफल रहा है।

प्रयागराज मंडल के चीफ पॉवर इंजीनियर विनोद कुमार गंगवार ने कहा, “इन महिलाओं ने यह सुनिश्चित किया है कि महामारी की दूसरी लहर के दौरान भी ग्रामीण क्षेत्रों से बिजली की बकाया वसूली इकठ्ठा की जाए। अब हम और अधिक ग्रामीण महिलाओं को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने की योजना बना रहे हैं। इस मिशन का उद्देश्य उन्हें सशक्त बनाना और एक महान राष्ट्रीय सेवा करना है।”

जबकि बिजली सखियों को काम शुरू करने से पहले मीटर पढ़ने और बिजली बिल बनाने की संक्षिप्त ट्रेनिंग दिया जाता है, इस अभियान में ज्यादातर महिलाएं पहली बार काम करने वाली थीं। एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक अमित शुक्ला ने उनके कौशल की सराहना की और उनके समर्पण की सराहना की।

उन्होंने कहा, “हमने 115 महिलाओं को प्रयागराज में बिजली सखियों के रूप में काम करने के लिए ट्रेन किया और उनमें से 102 ने बिजली मीटर की रीडिंग लेकर, बिल बनाकर और बकाया राशि जमा करके काम करना शुरू कर दिया है।”

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