महामारी के कारण अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों की मदद के लिए किए जा रहे कल्याणकारी उपायों के तहत, अब उत्तर प्रदेश सरकार ने अनाथ बच्चों के अभिभावकों के लिए अनुदान बढ़ाने का फैसला किया है, जिनकी आय कम है। नए निर्देशों के अनुसार, महामारी अनाथों के देखभाल करने वालों या अभिभावकों को 4,000 रूपये की मासिक आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी, यदि उनकी वार्षिक आय 2 लाख से कम है।

महिला एवं बाल कल्याण विभाग ऐसे सभी अनाथ बच्चों की पहचान करेगा


नवीनतम घोषणा के बारे में बोलते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा, "कानूनी या प्राकृतिक अभिभावक के लिए, दो लाख रुपये की वार्षिक आय बहुत कम है, इसलिए इसे बढ़ाया जाना चाहिए।" यदि किसी अनाथ के पास उसकी देखभाल करने के लिए कोई रिश्तेदार है, तो उक्त अभिभावक को बच्चे के वयस्क होने तक ₹4,000 की मासिक सहायता प्राप्त होगी। अधिकारियों ने आगे बताया कि, यदि बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नहीं है, तो बच्चे को बाल आश्रय गृह में रखा जाएगा।

महिला एवं बाल कल्याण विभाग को ऐसे सभी बच्चों की जल्द से जल्द व्यापक सूची तैयार करने को कहा गया है। इसके अलावा, अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि ऐसा कोई बच्चा छूटे नहीं। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के बारे में जानकारी देते हुए महिला एवं बाल कल्याण निदेशक मनोज राय ने कहा, "ऐसे बच्चों की पहचान करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, जिन्होंने कोविड-19 महामारी के कारण अपने माता-पिता को खो दिया है। अब तक 300 बच्चों की पहचान की जा चुकी है, काम अभी भी जारी है।"

बिना रिश्तेदारों के अनाथ बच्चों को राजकीय बाल गृह में रखा जाएगा


अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, मथुरा और लखनऊ में पांच राजकीय बाल गृह (बाल आश्रय गृह) हैं। अब इन केंद्रों का उपयोग उन अनाथों को रखने के लिए किया जाएगा जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने उन्हें शिक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए 'उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना' शुरू की है।

यह कहा गया है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और अटल आवासीय विद्यालय ऐसे बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करेंगे। इसके अलावा, राज्य के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि आर्थिक कारणों से इन बच्चों की शिक्षा में बाधा न आए। साथ ही ऐसे बच्चों को राज्य की 'अभ्युदय योजना' के तहत लैपटॉप और टैबलेट दिए जाएंगे। राज्य सरकार ने इस परियोजना के तहत लड़कियों की शादी के लिए 1,01,000 रुपये की वित्तीय मदद देने की भी योजना बनाई है।

- आईएनएस द्वारा मिली जानकारी के अनुसार