उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए और समाज के हर तबके तक इसके लाभ को पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। इसी कड़ी में प्रदेश के 27 जिलों में इसी महीने के अंत तक किडनी के मरीजों को मुफ्त डायलिसिस को सुविधा मिलेगी। ऐसे मरीजों को इलाज के लिए अब पड़ोसी जिलों या महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।

स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर स्थापित हो रही ये यूनिट अगस्त के अंत तक काम करने लगे। प्रदेश में अभी 48 जिलों के सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस यूनिटों का संचालन हो रहा है। इसके अलावा कानपुर नगर, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में दो-दो यूनिटें और हैं। ये यूनिटें जिला अस्पतालों में स्थापित की गई हैं। यहां मरीजों को मुफ्त सेवा दी जा रही है। अब 27 शेष बचे जिलों में भी इस सुविधा का विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए सेवा प्रदाता का चयन कर यूनिट स्थापना का कार्य चल रहा है। हर यूनिट में 6 से 10 बेड की व्यवस्था रहेगी।

एक बार के डायलिसिस का खर्च 5 से 7,000 रुपये तक आता है


प्रदेश में सरकारी से ज्यादा डायलिसिस यूनिटें प्राइवेट अस्पतालों में हैं। इनमें एक बार का खर्च 5 से 7, 000 रुपये आता है। जबकि सरकारी अस्पतालों में 52 यूनिटें हैं। इसके अलावा चिकित्सा संस्थानों और मेडिकल कॉलेजों में भी यह सुविधा है। जबकि निजी क्षेत्र में सर्वाधिक 24 सेंटर आगरा में हैं। इसके अलावा लखनऊ में 20, कानपुर नगर में 15, प्रयागराज में 11, मेरठ में 12, गाजियाबाद में 11 प्राइवेट सेंटर हैं। डा. विजय कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक (चिकित्सा उपचार),स्वास्थ्य महानिदेशालय के मुताबिक गरीब मरीजों को राहत देने के लिए सभी जिले में डायलिसिस यूनिटें स्थापित की जा रही है। यह कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा और मरीजों का मुफ्त इलाज हो सकेगा।

इन जिलों में लग रही डायलिसिस यूनिट

बाराबंकी, सीतापुर, बहराइच, ललितपुर, चित्रकूट, महोबा, महारजगंज, कानपुर देहात, फर्रुखाबाद, कन्नौज, औरैया, हरदोई, लखीमपुर खीरी, मैनपुरी, कासगंज, हाथरस, फतेहपुर, मऊ, बदायूं, पीलीभीत,शाहजहांपुर, संतकबीरनगर, संत रविदास नगर, संभल, शामली, गाजीपुर और चंदौली।