यूपी के सभी विश्वविद्यालयों में छात्रों को प्रमोट करने और डिग्री प्रदान करने के लिए तीन सदस्यों की समिति द्वारा नए सुझाव सामने रखे गए हैं। ये नए मानदंड यूपी के सभी विश्वविद्यालयों में लागू होंगे। सभी फ्रेशर्स को प्रमोट कर दिया जाएगा और 2020-21 के सेशन के परिणाम, दूसरे वर्ष के परीक्षा परिणामों पर निर्भर करेंगे। ये सुझाव महामारी की कठिन स्थिति को ध्यान में रखते हुए दिए गए हैं।

सेमेस्टर सिस्टम का पालन करने वाले विश्वविद्यालयों के लिए


तीन सदस्यों की समिति द्वारा दिए गए ये सुझाव उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में सभी यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों पर लागू होंगे। जो विश्वविद्यालय सेमेस्टर प्रणाली का पालन करते हैं, वे पिछले सेमेस्टर के अपने परिणामों के आधार पर दूसरे सेमेस्टर के छात्रों को प्रमोट करेंगे। यह नियम उन सभी यूजी और पीजी छात्रों पर भी लागू होगा जो वर्तमान में ऑड सेमेस्टर में हैं।

वार्षिक योजना का पालन करने वाले विश्वविद्यालयों के लिए


वार्षिक परीक्षा प्रणाली का पालन करने वाले विश्वविद्यालयों के लिए, समिति ने निर्णय लिया है कि प्रथम वर्ष के सभी छात्रों को द्वितीय वर्ष में प्रमोट किया जाएगा। ऐसे छात्रों के प्रथम वर्ष के परिणाम,दूसरे वर्ष में उनके प्रदर्शन के आधार पर तैयार किए जाएंगे।

इसके अलावा, जिन विश्वविद्यालयों ने 2020 में प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए परीक्षा आयोजित किये थे, वे 2020 की परीक्षा के ही आधार पर दुसरे वर्ष में, छात्रों के परीक्षा परिणाम तैयार करेंगे। इस प्रकार, वर्तमान में दूसरे वर्ष के छात्रों को तीसरे वर्ष में प्रमोट किया जा सकता है।

31 अगस्त तक घोषित होंगे नतीजे


हालांकि, जो छात्र अपने दूसरे वर्ष में हैं और 2020 में परीक्षा के लिए उपस्थित नहीं हुए हैं, उन्हें अगले वर्ष में प्रमोट किये जाने से पहले परीक्षा देनी होगी। ऐसे छात्रों के लिए प्रश्नावली एमसीक्यू (MCQ) में तैयार की जाएगी, इसलिए परीक्षा ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (ओएमआर) आधारित होगी।

अपने पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष में छात्रों को उनकी डिग्री प्रदान करने से पहले एक परीक्षा के माध्यम से मूल्यांकन किया जाएगा। यूपी के सभी विश्वविद्यालयों, निजी या सरकारी को 13 अगस्त से पहले परीक्षा आयोजित करने और 31 अगस्त तक परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया गया है।