पिछले कुछ महीनों से कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर पूरे भारत पर अपना कहर बरपा रही है, और कई लोग इस समय मेडिकल संसाधनों की कमी के चलते जूझते नज़र आये। देश भर में इस स्थिति को बेहतर करने के लिए कई कोशिशें की जा रही हैं और विस्तृत टीकाकरण अभियान का काम भी ज़ोरों से चल रहा है और अब इस कोरोना के खिलाफ जंग में एक और कोशिश शामिल हो गयी है।

लोगों को राहत देते हुए डीआरडीओ द्वारा बनायी गयी एंटी-कोविड दवाई 2-DG (2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज) के पहले स्टॉक को इस सप्ताह के शुरू में, कोविड ​​संक्रमित व्यक्तियों के लिए मंज़ूरी देकर रवाना किया गया था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने हैदराबाद की डॉ. रेड्डी लैब्स के साथ मिलकर इस दवाई पर काम किया और रक्षा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की उपस्थिति के बीच दवा की पहली कन्साइनमेंट को जनता के इस्तमाल के लिए जारी किया गया था।

दवाई कैसे काम करती है ?


यह दवाई एक पाउच में पाउडर फॉर्म में आती है, और इसे पानी के साथ लेना होता है। यह दवाई वायरस से संक्रमित कोशिकाओं (cells) में जमा हो जाती है और शरीर में सिंथेसिस को डैमेज करके और एनर्जी पैदा करके वायरस के विकास को रोकती है। शरीर में संक्रमण से प्रभावित कोशिकाओं का पता लगाकर और उन पर कार्य करने की अपनी विशेष क्षमता के साथ, यह 2 डीजी दवाई कोविड रोगियों को ठीक होने में काफी मदद करती हैं। रिपोर्ट के अनुसार दवा ने रिकवरी के समय को कम कर दिया है और प्रमुख लक्षणों को हल्का होने में 2.5 दिनों का औसत अंतर देखा गया है।

पहले राउंड में दिल्ली के अस्पतालों में वितरित की जाएंगी 10,000 खुराक


उद्घाटन समारोह में, रक्षा मंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री को दवा प्रदान की, और स्वास्थ्य मंत्री ने बाद में इसे इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया को प्रदान कर दिया। वितरण के पहले दौर में, दिल्ली के कुछ अस्पतालों को दवा मिलेगी और कुल 10,000 खुराक वितरित की जाएंगी। महामारी की स्थिति को देखते हुए, भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने पिछले सप्ताह दवा के लिए आपातकालीन स्वीकृति दी थी। ऐसी उम्मीद है की यह दवाई कोरोना के इलाज की प्रक्रिया में सुधार करेगी जिससे अस्पताल में भर्ती मरीज़ जल्द रिकवर हो जाएंगे और ऑक्सीजन सपोर्ट की निर्भरता को कम करेगी। 2-DG के साथ इलाज से अधिक मात्रा में कोविड मरीज़ों का आरटीपीसीआर नेगेटिव देखा गया है।

मई से अक्टूबर 2020 तक चला था दवा का फेज 2 ट्रायल


पिछले साल मई से अक्टूबर के बीच हुए फेज 2 ट्रायल में दवा के प्रभावों को देखा गया था, और इस साल बीमार रोगियों पर इसके प्रभाव देखे जाएंगे। संक्रमण की पहली लहर के दौरान, INMAS-DRDO के वैज्ञानिकों ने पिछले साल अप्रैल में 'सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी' (CCMB), हैदराबाद की मदद से लैब में एक्सपेरिमेंट किए। वहां, यह पता चला कि दवा वायरल विकास को रोकने में प्रभावी है और SARS COV-2 के खिलाफ काम कर सकती है।

इसके नतीजों के आधार पर ही ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI), सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSO) ने मई 2020 में कोविड-19 रोगियों मे में 2-डीजी के चरण-2 के क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति दी। दूसरे फेज़ को छह अस्पतालों में किया गया और देश भर के 11 अस्पतालों में फेज II B (डोज रेजिंग) क्लीनिकल ट्रायल किया गया, फेज-2 में 110 मरीजों का ट्रायल किया किया गया, और दूसरे चरण में जब कुछ सफलता मिली, तब तीसरे चरण में इसका ट्रायल दिल्ली, यूपी, बंगाल, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, समेत कई राज्यों के 27 अस्पतालों में किया गया, इनमें 220 मरीजों पर ट्रायल हुआ।