पृथ्वी को समर्पित देश का पहला म्यूजियम ऑफ अर्थ (टाइम) जल्द ही उत्तर प्रदेश में स्थापित किया जाएगा। संग्रहालय ,पैलियोसाइंसेज,जियोलॉजी, टेक्टॉनिक्स और पृथ्वी की प्रक्रियाओं की एक पूरी नई दुनिया होगी, और यह विशेष संग्रहालय भारी मात्रा में विज्ञान प्रेमियों को आकर्षित करेगा।

बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (बीएसआईपी), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, खान मंत्रालय, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से देश का एक पहला अर्थ संग्रहालय एक वास्तविकता बन जाएगा।

टाइम संग्रहालय जहाँ कीमती जीवाश्म संग्रह प्रदर्शित होगा

बीरबल साहनी इंस्टिट्यूट की डायरेक्टर, वंदना प्रसाद, संग्रहालय के लिए डीपीआर का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ, बीएसआईपी के वरिष्ठ वैज्ञानिक मुकुंद शर्मा भी 11 वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, पत्रकारों और टीम के सदस्यों के रूप में चुने गए विशेषज्ञों में शामिल हैं जिन्हें डीपीआर तैयार करने का काम सौंपा गया है।

संग्रहालय भारत के अद्वितीय भूवैज्ञानिक इतिहास और विरासत को प्रदर्शित करेगा और जीवाश्म विज्ञान में अत्याधुनिक अनुसंधान को बढ़ावा देगा। यह कीमती चट्टानों, मेटेरोराइट्स और जीवाश्म संग्रह के लिए एक राष्ट्रीय भंडार भी प्रदान करेगा। बीएसआईपी अपने दुर्लभ से दुर्लभ, सबसे पुराने और अद्वितीय जीवाश्म संग्रह को टाइम संग्रहालय के साथ साझा करेगा।

टीम को डीपीआर की ज़िम्मेदारी देने के पहले काफी अधिक ब्रैनस्टोर्मिंग की गयी और फिर प्रधान मंत्री विज्ञान प्रौद्योगिकी इनोवेशन सलाहकार कॉउन्सिल के समक्ष संग्रहालय की प्रेजेंटेशन दी गयी।

एक पीपीपी मॉडल 

संग्रहालय महान पुरा वनस्पतिशास्त्री स्वर्गीय प्रो. बीरबल साहनी के समृद्ध संग्रह को प्रदर्शित करेगा। इसमें कीड़ों के लाखों साल पुराने जीवाश्म और मध्य प्रदेश के केले के सबसे पुराने जीवाश्म रिकॉर्ड भी प्रदर्शित होंगे। इसके अलावा, संग्रहालय में देश और अन्य से शकरकंद का सबसे पुराना रिकॉर्ड भी शामिल होगा,

कथित तौर पर, प्राइवेट सेक्टर, परोपकारी और राज्य सरकारों की भागीदारी को शामिल करके द म्यूज़ियम ऑफ़ अर्थ के लिए कार्यान्वयन का एक पीपीपी मॉडल अपनाया जाएगा।

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