उत्तर प्रदेश में गंभीर मरीज़ों के इलाज के सभी मेडिकल कालेजों को वर्चुअल आइसीयू से जोड़ा जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम से छोटे शहरों व दूर दराजों के मेडिकल अस्पतालों में भर्ती गंभीर मरीज़ों को समय पर विशिष्ट चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ डाक्टरों की मदद और बेहतर इलाज मिल पाएगा।

मरीज़ों का जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध होगी

रिपोर्ट के अनुसार, रोगियों से संबंधित पूरी जानकारी और उनकी केस हिस्ट्री को ऑनलाइन उपलब्ध करवाया जाएगा। अन्य संस्थानों के विशेषज्ञ डॉक्टरों के परामर्श से मरीज़ों का इलाज किया जाएगा। इस सुविधा से गंभीर रोगियों को इलाज के लिए बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा और उनकी जान बचाई जा सकेगी।

प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार ने बताया कि हब एंड स्पोक मॉडल के तहत अब सभी मेडिकल कालेज के आइसीयू एक-दूसरे से वर्चुअल जोड़े जाएंगे। मरीज की हालत ज्यादा गंभीर होने की स्थिति में अभी उसे छोटे शहर से बड़े शहर इलाज के लिए लाना पड़ता है, कई बार रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देता है।

राज्य में मेडिकल कॉलेजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, उन्हें टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा रहा है। संजय गांधी पीजीआइ, केजीएमयू और डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान सहित अन्य विशिष्ट चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ डाक्टरों का लाभ इन सभी मेडिकल कालेजों को मिलेगा। विशेषज्ञ  डाक्टरों की निगरानी में अन्य मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर मरीज़ों का बेहतर इलाज कर पाएंगे।

कोविड काल किया गया था इस सुविधा का इस्तेमाल

कोविड के समय में भी अस्पतालों के आइसीयू को वर्चुअल रूप से जोड़ा गया था, जिससे मरीज़ों के इलाज में मदद मिली थी, अब इसका विस्तार किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से इस तरह की पहल पहली बार की गई है। इसकी शुरुआत के बाद छोटे जिलों के मेडिकल कालेजों को निश्चित रूप से फायदा मिलेगा।

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