दुनिया के सात अजूबों में शुमार आगरा के ताजमहल से तो सबकोई वाकिफ़ है लेकिन आगरा से 43 किमी. दूर फतेहपुर सीकरी में दुनिया का सबसे बड़ा द्वार स्थित है जिसे ‘बुलंद दरवाज़ा’ कहा जाता है। 1571 ई. से 1585 ई. तक मुग़ल साम्राज्य की राजधानी रही फतेहपुर सीकरी के ‘बुलंद दरवाज़े’ का नाम  उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक स्मारकों के नामों के साथ अंकित है। इस विशाल स्मारक को यूनेस्को द्वारा ‘विश्व विरासत स्थल’ का दर्जा प्रदान किया है। प्राचीन काल में इस दरवाज़े का इस्तेमाल फतेहपुर सिकरी के दक्षिण-पूर्वी प्रवेश द्वार पर सैनिकों के गस्त देने के लिए किया जाता था । बुलंद दरवाज़े से जुड़े बहुत सारे ऐसे तथ्य है जो आज हम आपको इस लेख में बताएंगे।

विजय स्मृति को दर्शाता है

जिस तरह शाहजहां ने मुमताज़ की याद में ताजमहल बनवाया था उसी तरह बुलंद दरवाज़े का निर्माण मुग़ल सम्राट अकबर ने 1602 में गुजरात पर अपनी फतह दर्शाने के लिए करवाया। 12 वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद कारीगरों ने इस भव्य द्वार का निर्माण पूरा किया। बुलंद दरवाज़े की भव्यता का अंदाज़ा आप इसी से लगा सकते हैं की इसकी ऊंचाई 53.63 मीटर और लम्बाई 35 मीटर है।

ज़मीन की सतह पर स्तिथ न होकर यह दरवाज़ा 42 सीढ़ियों के ऊपर स्तिथ है जिसकी वजह से इसकी ज़मीन से ऊंचाई 280 फुट है और इसके निर्माण में अनेकों ‘लाल बलुआ’ पत्थरों को उपयोग में लाया गया जिसकी सज्जा सफ़ेद संगमर्मर से करी गयी थी। इस द्वार में 400 साल पुराने आबनूस से बने विशाल किवाड़ आज भी मज़बूती से खड़े हैं । अगर आप द्वार की छत की ओर नज़र डालें तो पाएंगे की इसका ऊपरी हिस्सा गुम्बद और मीनारों से सजा है।

धार्मिक सहिष्णुता का है प्रतीक

बुलंद दरवाज़ा पारम्परिक मुग़ल रचना और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक माना जाता है क्यूंकि इसपर लिखा पारसी शिलालेख अक़बर के खुले विचारों को दर्शाता है। इसके स्तम्भों पर क़ुरान की आयतें लिखी हुईं हैं और दरवाज़े के तोरण पर बाइबिल की कुछ पंक्तियाँ भी लिखीं हुईं हैं जो इस प्रकार हैं, “यह संसार एक पुल की तरह है, इस पर से गुज़रो जरूर, लेकिन इस पर कोई घर मत बनाओ,जो व्यक्ति एक दिन की आशा रखता है वह चिरकाल तक की भी आशा रख सकता है, जबकि यह संसार कुछ घंटे भर के लिये ही है, इसलिये अपना समय परमेश्वर के प्रार्थना में बिताओ ” । जिस तरह हर दरवाज़ा किसी न किसी तरफ खुलता है उसी तरह यह विशाल द्वार एक बड़े आँगन की ओर खुलता है जिसकी बाईं तरफ जामा मस्जिद है और सामने शेख़ की मज़ार स्थित है।

मिली थी ख़ूफ़िया सुरंग

कुछ वक़्त पहले दरवाज़े के पास लंगर ख़ाने में कामगारों ने एक सुरंग खोज निकाली जो कहाँ जाती है ये आजतक एक राज़ है पर मान्यता है की इस सुरंग का एक सिरा क़िले के बाहर से निकलेगा। बुलंद दरवाज़े की भव्यता को देखने प्रतिदिन दूर-दूर से लोग आते हैं।

यह लेख ऋतिक वर्मा द्वारा लिखा गया है।

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