अमूमन हमें हमेशा अपने दैनिक कार्यों के लिए अपने दाहिने हाथ का उपयोग करना सिखाया गया है लेकिन आपने देखा होगा कि ऐसे कई लोग हैं जो अपने बाएं हाथ से भी बहुत अच्छे से लिख लेते हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि दुनिया भर में ऐसे जीनियस हैं जो दोनों हाथों से एक साथ लिख सकते हैं।

जी हाँ, और ऐसे लोग भारत के मध्य प्रदेश में सिंगरौली नामक स्थान पर मौजूद हैं। वीणा वादिनी स्कूल के छात्रों में दोनों हाथों को समान शक्ति से उपयोग करने का यह उभयलिंगी (ambidextrous) कौशल है। इसे पढ़कर, पहला विचार जो हमारे दिमाग में आएगा, वह है थ्री इडियट्स में वीरू सहस्त्र बुद्ध,बोमन ईरानी द्वारा अभिनीत, जो इस कौशल का उपयोग दो अन्य प्रमुख पात्रों, राजू और फरहान के माता-पिता को पत्र लिखने के लिए करता है।

छह अलग-अलग भाषाओं के लिए दोनों हाथ

यह भारत का एक और एकमात्र ‘उभयलिंगी’ स्कूल है, जिसमें 150 से अधिक छात्र हैं जो एक ही समय में दोनों हाथों का उपयोग करके लिखते हैं।
इन छात्रों में दोनों हाथों से लिखने की तेज गति है और इस कहानी के बारे में एक और आकर्षक बात यह है कि वे हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, संस्कृत, अरबी और रोमन जैसी छह अलग-अलग भाषाओं में लिख सकते हैं।

इस असाधारण कौशल के विकास के पीछे कौन है?

पारम्परिक शिक्षा से हटकर वीरेंद्र प्रताप शर्मा जो स्कूल के शिक्षक और प्रधानाध्यापक और एक भूतपूर्व सैनिक हैं, जो भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के इसी कौशल से प्रेरित हुए थे। तब से उन्होंने ठान लिया की वे इस अद्भुत विधा का परिचय नयी पीढ़ी को अवश्य करवाएंगे। इस क्रम में जब उन्होंने इतिहास को खंगालना शुरू किया तब एक और नयी बात सामने आयी की प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के छात्र प्रतिदिन 32000 शब्दों को लिखने की क्षमता रखते थे। इस तथ्य को जानकार वे काफी उत्साहित हुए और 8 जुलाई 1999 को उन्होंने वीणा वादिनी विद्यालय स्थापित किया।

कैसे सिखाई जाती है छात्रों को यह अनोखी विधा

 

जब भी कोई नया बच्चा आता है, तो वह एक हाथ से कलम पकड़ता है, और उन्हें एक महीने के बाद दूसरे हाथ का इस्तेमाल करना सिखाया जाता है। इसके बाद छात्रों को दोनों हाथों को एक साथ इस्तेमाल करना सिखाया जाता है। 45 मिनट की कक्षा में, प्रत्येक छात्र 15 मिनट तक दोनों हाथों से लिखने के लिए विषय का अभ्यास करता है। ऐसी अनोखी विधा को सीखने के लिए मस्तिष्क की एकाग्रता बहुत ज़रूरी है। इसीलिए विद्यालय में योग की ट्रेनिंग भी अनिवार्य रूप से दी जाती है।

यह कौशल क्या दर्शाता है?

उभयलिंगीपन का कौशल इंगित करता है कि उस व्यक्ति के मस्तिष्क के बाएँ और दाएँ भाग बहुत अधिक सममित हैं। रीडर्स डाइजेस्ट में प्रकाशित एक लेख के अनुसार कुल जनसंख्या का केवल 1 प्रतिशत ही उभयलिंगी है।

उभयलिंगी कौशल वाली प्रसिद्ध हस्तियां

डॉ. राजेंद्र प्रसाद, लियोनार्डो दा विंची, बेन फ्रैंकलिन और अल्बर्ट आइंस्टीन इतिहास के कुछ सबसे प्रसिद्ध व्यक्तित्व हैं जो भारत में इन छात्रों के समान कौशल साझा करते हैं।

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