इंदौर की एक महिला पुलिस सब-इंस्पेक्टर अनिला पाराशर जरूरतमंदों की मसीहा बनकर उभरी हैं। वे गरीबों को ‘ठंड के सिपाही’ नामक अपनी पथप्रदर्शक पहल के साथ सर्द सर्दियों के तापमान से बचा रही हैं। यह परियोजना 2019 में शुरू हुई और इंदौर के निराश्रितों को ठंड से बचाने के लिए कंबल उपलब्ध कराने का सहानुभूति पूर्ण कार्य कर रही है। आईये जानते हैं की किस प्रकार अनिला पाराशर ने लिंग मानदंडों को तोड़ते हुए, इस परियोजना को शुरू किया और जरूरतमंद लोगों के लिए अधिक से अधिक कार्य किया:

कोई भी जरूरतमंद या बूढ़ा व्यक्ति बिना कंबल के न रहे

“2019 में, मैंने एक महिला को घर और कंबल के अभाव में मरते देखा। उसके बाद, मैंने यह कंबल वितरण अभियान शुरू किया और मुझे ऐसा करते हुए तीन साल हो गए हैं। इस पहल के हिस्से के रूप में, हम कोशिश करते हैं कि कोई बूढा व्यक्ति या जरूरतमंद बिना कम्बल के ना रहे। पुलिस ने यह भी बताया कि इस पहल के एक हिस्से के रूप में पिछले साल 8,000 से अधिक कंबल जरूरतमंदों के बीच वितरित किए गए थे।

अनिला इंदौर के लोगों के बीच अपनी दृष्टि का प्रचार करने में सफल रही, जिन्होंने परियोजना के दायरे और पहुंच को बढ़ाने के लिए अपना समर्थन दिया। सिर्फ दो वर्षों में ‘ठंड के सिपाही’ दो समूहों से जुड़ा है जो लोगों के बीच बांटने के लिए कंबल उपलब्ध कराते हैं।

अनिल की सराहना लिंग के मानदंडों और अन्य पितृसत्तात्मक धारणाओं को तोड़ने के लिए की गयी है जो महिलाओं को उनके घरों के अंदर सीमित करती है। अनिला ने न केवल एक नागरिक नौकरी की है, बल्कि उन्होंने अपना जीवन लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया है और उनकी दिमाग की उपज यह कल्याण परियोजना इसका एक प्रमाण है।

 

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