भारतीय शैक्षणिक स्तर को आसमान की ऊंचाईयों तक ले जाने के लिए प्रथम एनजीओ की सीईओ डॉ रुक्मिणी बनर्जी को शिक्षा के क्षेत्र में मिलने वाला सबसे बड़े एवं प्रतिष्ठित यिदान पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार उन्हें बच्चों में बच्चों में सीखने की प्रवृत्ति को सुधारने के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए दिया गया है। इस पुरस्कार के लिए 130 देशों के शिक्षाविदों और रिसर्चर ने आवेदन किया था जिनमें से रुक्मिणी ने यह पुरूस्कार जीतकर अपने देश को गौरवान्वित किया है।

उदारता,धैर्य और दृढ संकल्प के धागों से बंधी एक कहानी

 

 

 

 

 

 

 

रुक्मिणी मूल रूप से बिहार की रहने वाली हैं और दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकॉनमिक्स से ग्रेजुएट हैं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स से मास्टर्स किया और साल 1991 में शिकागो यूनिवर्सिटी से पीएचडी से उत्तीर्ण हुईं। शिकागो से पीएचडी करने के बाद रुक्मिणी भारत लौट आईं और ग्रामीण बच्चों की शिक्षा के लिए काम करने लगीं। वह अखबारों में हिंदी और अंग्रेजी में कॉलम लिखती हैं। इसके साथ ही वह बच्चों के लिए कहानियां भी लिखती हैं।

गैर सरकारी संगठन ‘प्रथम‘ में वह साल 2015 में सीईओ बनीं। बिहार सरकार ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में दिया जाने वाला पुरस्कार मौलाना अबुल कलाम पुरस्कार से सम्मानित किया है। वह इस पुरस्कार की पहली विजेता थीं।

रुक्मिणी और उनकी टीम ने 100 दिनों में 6 लाख बच्चों और उनके परिवार वालों के बार में रिसर्च किया। इसमें वे बच्चे भी शामिल थे, जो कई सालों से स्कूल जा रहे थे, लेकिन उन्हें गणित के मामूली सवाल भी नहीं आते थे। भारत में डॉ बनर्जी और उनकी टीम के नेतृत्व में शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (एएसईआर) मूल्यांकन दृष्टिकोण ने उन बच्चों के बीच साक्षरता और संख्यात्मक अंतर का खुलासा किया, जिन्होंने पहले ही स्कूल में कई साल बिताए थे। इन कमियों को दूर करने के लिए, उनकी टीम का ‘टीचिंग एट द राइट लेवल’ (Teaching at the Right Level) कार्यक्रम स्कूलों और स्थानीय समुदायों के साथ काम करता है और यह सुनिश्चित करता है की शिक्षा के क्षेत्र में कोई बच्चा पीछे न रहे।

यिदान पुरस्कार एक एजुकेशनल पुरस्कार है जो व्यक्तियों, या तीन सदस्यीय टीमों को मान्यता देता है, जिन्होंने शिक्षा अनुसंधान और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यिदान पुरस्कार यिदान पुरस्कार फाउंडेशन द्वारा प्रदान किया जाता है जो की शिक्षा में प्रगति और परिवर्तन पर काम करने वाला एक वैश्विक परोपकारी शिक्षा फाउंडेशन है और 2016 में इसकी स्थापना के बाद से नौ लोगों ने इसे प्राप्त किया है जिसमें 5 महिलाएं हैं।

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