देश में बिना ड्राइवर के ट्रेन दौड़ाने के लिए ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन तकनीक पर अनुसंधान अभिकल्प व मानक संगठन (आरडीएसओ) ने तैयारियां शुरू कर दिए हैं। ट्रेन टकराव बचाव प्रणाली (टिकास) के पहले फेस के ट्रायल में आरडीएसओ ने बिना ड्राइवर ट्रेन, लूप लाइन स्पीड कंट्रोल, समपारों पर आटोमेटिक सीटी बजाने जैसे नए फीचर शामिल किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आरडीएसओ ने अगले दो साल के भीतर 200 किलोमीटर प्रतिघंटे की गति से ट्रेन चलाने की योजना भी बनाई है। इस बात की जानकारी शुक्रवार को आरडीएसओ के महत्वपूर्ण प्रोजेक्टों की समीक्षा करने के बाद यह जानकारी महानिदेशक संजीव भूटानी ने दी।

वंदे भारत एक्सप्रेस के 44 ट्रेन सेट को तीन की जगह एक साल में किया जाएगा तैयार

रिपोर्ट के अनुसार, महानिदेशक ने बताया कि 160 किमी. प्रतिघंटे की गति से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस के 44 ट्रेन सेट को कोच फैक्ट्री अब तीन की जगह एक साल में तैयार करेगी। अगले साल अप्रैल में इसका पहला प्रोटोटाइप भी आ जाएगा। इसके लिए दो गुणे 25 केवी वाली ओएचई अपग्रेड होगी। आरडीएसओ लाइन की क्षमता को बढ़ाने के लिए आर-1175 श्रेणी की रेल बना रहा है।

अब 26 बोगियों वाली ट्रेनों को 160 किमी. प्रतिघंटे की गति से चलाने के लिए डब्ल्यूएपी-7 एचएस इंजन का विकास किया गया है, जबकि मिशन रफ्तार के तहत मालगाडिय़ों को 100 किमी. प्रतिघंटे की गति से दौड़ाने के लिए डब्ल्यूएजी-9 एचएच का ट्रायल सिमंस व मेघा इंटरप्राइजेज नाम की दो कंपनियों ने किया है। बीएचईएल का ट्रायल अभी बाकी है। आक्सीजन को एक जगह से दूसरी जगह तेजी से पहुंचाने के लिए रोल आन रोल ऑफ वैगन डिजाइन हो रहा है। इसका डिजाइन तैयार है और ट्रायल इसी माह से होगा।

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