उत्तर और पश्चिम भारत, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की हवा में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) का स्तर, औसत स्तर से अधिक पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, तीन क्षेत्रों ने नवंबर 2021 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सुरक्षा सीमा का उल्लंघन किया है, जिससे हवा की गुणवत्ता पर और साथ ही लोगों के स्वास्थ्य पर काफी खराब असर पड़ा है। प्रमुख रूप से,  NO2 एसिड रेन के प्राथमिक कारणों में से एक है, जो प्रकृति, संपत्ति के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।

दिल्ली में मॉनिटरिंग साइट्स पर NO2 का स्तर सीपीसीबी द्वारा निर्धारित स्तर से अधिक पाया गया

इसका मतलब है कि दिल्ली में लगातार सात वर्षों से NO2 का स्तर सीपीसीबी द्वारा निर्धारित 40 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब के स्तर को पार कर रहा है। इन वर्षों में 2020 में कोविड लॉकडाउन वाला समय भी शामिल है जब दिल्ली का वार्षिक NO2 औसत 61 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब पर था।

नवंबर 2021 तक, दिल्ली में 40 मॉनिटरिंग साइट्स में से लगभग 15 ने 80 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब से अधिक NO2 का दैनिक औसत दर्ज किया, जबकि अन्य 18 साइट्स पर पूरे महीने CPCB द्वारा निर्धारित NO2 के लिए 40 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब सुरक्षा सीमा से ऊपर वार्षिक औसत दर्ज किया गया। आपको बता दें, WHO वार्षिक NO2 औसत को 10 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब और दैनिक 25 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब पर सीमित करता है।

Rising NO2 levels in Uttar Pradesh & Rajasthan

ऐसा ही एक खतरा राजस्थान पर भी मंडरा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रेगिस्तानी राज्य में 8 शहरों में सिर्फ 10 निगरानी स्थल हैं। इनमें से लगभग 50% में ऐसे दिन दर्ज किए गए हैं, जहां NO2 का स्तर दैनिक औसत को पार कर गया है। इनमें भिवाड़ी में रीको औद्योगिक क्षेत्र, जोधपुर में समाहरणालय और उदयपुर में अशोक नगर शामिल हैं। विशेष रूप से, राजधानी शहर जयपुर में तीन निगरानी स्थल हैं, जिनमें से दो – पुलिस आयुक्तालय और आदर्श नगर उपरोक्त सूचकांक में शामिल हैं।

पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य पर NO2 का प्रभाव

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