मौसमी फ्लू और महामारी की बढ़ती चिंताओं के बीच, लखनऊ में डेंगू के मामलों की संख्या में गिरावट से अधिकारियों और जनता को समान रूप से राहत मिली है। रविवार तक, राज्य में केवल 32 सक्रिय रोगियों का इलाज चल रहा था, जो पिछले मामलों की अपेक्षा कम है। आंकड़ों के अनुसार, कुल मामलों में से 16 मामले कानपुर में मौजूद हैं, और लोगों के ठीक होने के साथ, बिमारी पर नियंत्रण पाया जा रहा है।

लखनऊ में डेंगू के मामलों की संख्या 1525 हो गई है

विशेष रूप से डेंगू को नियंत्रित करने में को डेंगू को रोकने के लिए राज्य के लक्षित निगरानी कार्यक्रमों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यूपी सरकार ने इस साल अक्टूबर की शुरुआत में जमीनी स्तर पर निगरानी कार्यक्रम शुरू करने के साथ इस वेक्टर रोग के खिलाफ कई महत्वपूर्ण कदम उठाएं गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि जल जनित बीमारियों की जांच के लिए कई अन्य आवश्यक प्रबंध भी किए गए हैं।

निगरानी समितियां अब बड़े पैमाने पर राज्यव्यापी निगरानी अभियान में लगी हुई हैं, कोविड-19 के साथ-साथ डेंगू, हैजा, डायरिया, मलेरिया के मामलों का पता लगाने के लिए नियमित रूप से डोर-टू-डोर सर्वेक्षण करने के लिए कई टीमों को तैनात किया गया है।

विशेषज्ञों ने डेंगू की गिरावट के लिए तापमान में गिरावट को कारण बताया

विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू के नए मामलों की गिरती संख्या तापमान में गिरावट का परिणाम भी हो सकती है। ठंडे वातावरण आमतौर पर मच्छरों के प्रजनन को प्रतिबंधित करते हैं, जिससे मामलों में कमी आती है। इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि डेंगू पैदा करने वाले एनोफिलीज और एडीज एजिप्टी मच्छर प्रजनन और पनपने के लिए 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान को पसंद करते हैं।

जैसे ही तापमान लगभग 20 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, वे खुले में कम सक्रिय हो जाते हैं, जिससे संक्रमण कम होता है। अध्ययनों में आगे कहा गया है कि ये वैक्टर 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान पर काम नहीं कर सकते हैं, जो पूरे उत्तर प्रदेश में सर्दियों के दौरान आम है।

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