मुख्य बातें:

  • लखनऊ विश्वविद्यालय के वन्यजीव विज्ञान संस्थान ने राजभवन की जैव विविधता पर एक अध्ययन किया।
  • ठंड, गर्मी और बरसात के मौसम में किया अध्ययन
  • अध्ययन में  यहां पर 35 प्रजातियों की तितलियां पाई गईं।
  • 56 प्रजातियों के पक्षी पाए गए।
  • 96 परिवारों के वृक्षों और पौधों की कुल 256 प्रजातियां पाई गईं।

लखनऊ का राजभवन विभिन्न पौधों, तितलियों, और पक्षियों की प्रजातियों से गुलज़ार है। पौधों और जीवों की विविधता ने इस परिसर की सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के वन्यजीव विज्ञान संस्थान की ओर से राजभवन की जैव विविधता (बायो डायवर्सिटी) पर कराए गए एक साल के अध्ययन में पाया गया है कि यहां पर 35 प्रजातियों की तितलियों, 56 प्रजातियों के पक्षियों और 96 परिवारों के वृक्षों और पौधों की कुल 256 प्रजातियों का बसेरा है। जल्द ही इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट को राजभवन भेजा जाएगा।

तीनों मौसम में किया गया अध्ययन

लखनऊ विश्वविद्यालय के वन्यजीव विज्ञान संस्थान ने पूरे शहर का बायो डायवर्सिटी इंडेक्स बनाया था, जिसके बाद नवंबर 2020 में राज्यपाल ने राजभवन की जैव विविधता पर भी अध्ययन करने के लिए कहा था। विभाग की कोआर्डिनेटर प्रो. अमिता कनौजिया और उनकी टीम में शामिल परियोजना अधिकारी आदेश कुमार, शोधार्थी रुचिरा निगम व ऐश्वर्या राय ने राजभवन जाकर इस पर अध्ययन किया था।

रिपोर्ट के अनुसार, राजभवन की जैव विविधता के लिए ठंड, गर्मी और बरसात तीनों मौसम में अध्ययन किया गया। जिसमें यह पाया गया कि यहां की जैव विविधता में संरक्षण की दृष्टि से काफी संभावनाएं हैं। यहां अकशेरुकी और कशेरुकियों की एक विशाल जैव विविधता को आश्रय मिलता है

मकड़ियों की भी पांच प्रजातियां पाई गईं

रिपोर्ट के मुताबिक 235 प्रजातियों के पौधों के साथ-साथ यहां कामन गल, वंडर, कास्टर, पिकाक पैंसी, लाइम, कामन मारमोन, ब्लू पेंसी, एग्फ्लाई सहित 35 प्रजातियों की तितलियां पाई गईं। आर्थोपोड्स (कीट पतंगे) की 67, एनेलिड्स (केंचुआ आदि) और मोलस्क (घोंघा) की दो और मेंढक व सरीसृप की तीन-तीन प्रजातियां देखने को मिलीं। साथ ही मकड़िया की भी पांच प्रजातियां यहां पाई गईं। अध्ययन के दौरान 12 परिवारों से संबंधित पक्षियों की 56 प्रजातियां भी पाई गईं।

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