उत्तर प्रदेश में कोविड-19 की दूसरी लहर के प्रकोप के चलते, लखनऊ की मीडिया और अन्य लोगों का ध्यान काफी हद तक ऑक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता, टीकाकरण अभियान और इसी तरह के मुद्दों पर केंद्रित है। हालांकि, इन सबमें कई लोग यह भूल गए हैं कि हमारा शहर भूख और गरीबी से जुड़े मुद्दों से भी जूझ रहा है।

ऐसे समय पर मदद का हांथ आगे बढ़ाते हुए, मूल सुविधाओं से वंचित बच्चों और गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए 'विशालाक्षी फाउंडेशन' आगे आया है, जिसने पहले भी लोगों की सहायता करने के लिए लखनऊ में कई ऐसे अभियान चलाए हैं जो काफी लाभकारी साबित हुए थे।

खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं!

आज के समय में समाज की सेवा के लिए कई लोग और समूह आगे आ रहे हैं और निःस्वार्थ भावना से समाज की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। विशालाक्षी फाउंडेशन, दिल्ली, गुड़गांव, लखनऊ, बांदा, अमरोहा, नोएडा, फतेहपुर, रांची और जयपुर में कार्यरत एक ऐसा धर्मार्थ संगठन (charitable organisation) है।

वर्तमान में, विशालाक्षी फाउंडेशन अन्य लोगों को अपनी पहल से जुड़ने के लिए आमंत्रित कर रहा है, जिसके तहत वे लखनऊ के जरूरतमंदों के बीच भोजन के पैकेट वितरित करेंगे। इस तरह के अभियान के अलावा, अन्य परियोजनाएं जैसे ड्रीम स्लम प्रोजेक्ट और मस्ती की पाठशाला भी फाउंडेशन से संबंधित हैं।

इन पहलों के साथ, वे विशेष रूप से उन अमानवीय परिस्थितियों का उत्थान करना चाहते हैं, जिनमें स्लम क्षेत्रों के बच्चे रहते हैं। वे इन बच्चों को मुफ्त भोजन और शिक्षा प्रदान करते हैं ताकि वह इन मूल अधिकारों से वंचित न रह जाएं।

नॉक-नॉक

प्रसिद्ध कहावत के साथ- "खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं", विशालाक्षी फाउंडेशन वंचितों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने का बीड़ा उठा रहा है। वे समाज के वंचित तबके के लोगों को बुनियादी जरूरतें मुहैया कराकर उनके अस्तित्व, सुरक्षा, विकास और भागीदारी के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।