लखनऊ विश्वविद्यालय कार्य परिषद की बैठक बीते शुक्रवार को हुई। कार्य परिषद ने बैठक में महत्वपूर्ण फैसला लिया है और कहा है कि लखनऊ विश्वविद्यालय में कुलपति और अन्य प्रोफेसर उन छात्रों के शिक्षा के खर्च को उठाएंगे जिन्होंने महामारी के कारण एक या दोनों माता-पिता को खो दिया है। इस योजना के तहत वीसी ने शुक्रवार को ऐसे ही एक छात्र की जिम्मेदारी ली और अन्य प्रोफेसरों से भी इसी तरह के कदम उठाने का अनुरोध किया। रिपोर्ट् के मुताबिक, अब छात्र कल्याण विभाग के रजिस्ट्रार, चीफ प्रॉक्टर और डीन एक-एक बच्चे की शिक्षा का खर्च उठाएंगे।

लाभार्थियों की पहली सूची में करीब 70 छात्र


रिपोर्ट के मुताबिक, वीसी प्रोफेसर आलोक कुमार ने हाल ही में कार्यसमिति की बैठक बुलाई थी। वहां छात्र कल्याण समिति की डीन डॉ. पूनम टंडन ने बताया कि विश्वविद्यालय के 70 विद्यार्थियों ने अपने एक या दोनों माता-पिता को कोरोना वायरस के कारण खो दिया है। यह कहा गया है कि ऐसे छात्रों की शिक्षा से संबंधित फीस और अन्य खर्च विश्वविद्यालय के विभिन्न अधिकारियों द्वारा उठाये जाएंगे। महामारी ने शहर भर के लोगों के जीवन में भयंकर कहर बरपा रखा है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, विभिन्न संस्थानों के अधिकारियों के लिए ऐसे उपाय करना अनिवार्य है।

इसके अतिरिक्त, अधिकारियों ने विश्वविद्यालय के वे कर्मचारी जिन्होंने महामारी के कारण दम तोड़ दिया, उनके पीछे छूट गए परिजनों के रोजगार पर भी विचार-विमर्श किया। परिवार के सदस्यों के उचित वेरिफिकेशन के बाद, उन्हें उनकी योग्यता के आधार पर विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर नियुक्त किया जाएगा।