संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SGPGI) ने 52 मेडिकल विशेषज्ञों की राय को एकजुट करने के लिए और ब्लक फंगस के निवारक प्रोटोकॉल पर चर्चा करने के लिए एक ऑनलाइन समारोह आयोजित कराया। म्यूकोर्मिकोसिस (Mucormycosis) या ब्लैक फंगस, कोरोना से रिकवर हो गए मरीज़ों में एक पोस्ट कोविड स्वास्थ्य समस्या के रूप में तेज़ी से विकसित हो रहा है। महामारी के चलते इस संक्रमण को प्रभावी उपचार की मदद से फैलने से बचाना और इसके सम्बन्ध में एक वर्कफोर्स तैयार करना ही इस ऑनलाइन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था।

एसजीपीजीआई के डायरेक्टर कहते हैं, 'ब्लैक फंगस को आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है'


चिकित्सा के सन्दर्भ में यह अनुमान लगाया है की ब्लैक फंगस से संक्रमित होंने वाले मरीज़ों में अनियंत्रित डायबिटीज एक मुख्य फैक्टर है। इसके अलावा जिन मरीज़ों को कोरोनो वायरस से लड़ने के लिए हाई स्टेरॉयड और हाई एंटी बायोटिक इंजेक्शन दिए गए थे, वे भी ब्लैक फंगस से संक्रमित हो सकते हैं। सहरुग्णता (comorbidity) वाले लोग और एचआईवी/एड्स या कैंसर के कारण अत्यधिक कमजोर इम्युनिटी सिस्टम वाले लोग भी इस जोखिम की श्रेणी में आते हैं।

एसजीपीजीआई के डायरेक्टर आर.के. धीमान ने कहा, "म्यूकोर्मिकोसिस एक असामान्य, आक्रामक फंगल संक्रमण है जो इम्युनिटी की कमी वाले रोगियों में होता है। इससे संक्रमित होने में अनियंत्रित डायबिटीज सबसे आम जोखिम का फैक्टर देखा गया है। ये फंगस हवा, मिट्टी और मलबे में मौजूद होते हैं और इससे दूषित हवा में सांस लेने से साइनस और फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं। स्टेरॉयड के साथ इलाज करवा रहे अनियंत्रित डायबिटीज वाले कोरोना रोगियों में संक्रमण का खतरा और भी बढ़ जाता है।"

हालांकि उन्होंने यह भी बताया है यह संक्रमण एक केंद्रित दृष्टिकोण के साथ आसानी से ठीक हो सकता है। उन्होंने कहा इस सम्बन्ध में एक सफल परिणाम प्राप्त करने के लिए एक माइक्रोबायोलॉजिस्ट, ईएनटी विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ और डायबिटीज विशेषज्ञ की भूमिका महत्वपूर्ण है।

ब्लैक फंगस के इलाज के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग


इसी सम्बन्ध में उत्तर प्रदेश के डॉक्टरों को ब्लैक फंगस के इलाज के लिए ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जायेगी। राज्य प्रशासन ने सम्बंधित अधिकारियों को सभी मेडिकल कॉलेजों, मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) और एसजीपीजीआईएमएस में इलाज में शामिल अन्य चिकित्सकों से तत्काल जुड़ने का निर्देश दिया है।

इन अधिकारियों को जल्द से जल्द इलाज के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार करने और जारी करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राज्य स्तरीय सलाहकार समिति के साथ मेलजोल बिठाने का भी काम सौंपा गया है। ब्लैक फंगस मामलों की बढ़ती संख्या से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रशासन ने एसजीपीजीआई में म्यूकोर्मिकोसिस (सीएएम) प्रबंधन टीम से जुड़े एक विशेष 12-सदस्यीय 'कोविड-19' का गठन किया है।

यह टीम मामलों के डेटाबेस के साथ-साथ रैपिड रिस्पांस टीम बनाने, उपचार प्रोटोकॉल बनाने और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कार्यरत रहेगी। इसके अलावा, राज्य में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में अधिक टीमों का गठन, आईसीएमआर दिशानिर्देशों के अनुसार मामलों की जल्द जांच और प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य कर्मियों के बीच जागरूकता और संवेदीकरण पैदा करना भी उनकी मुख भूमिकाओं में से एक है। यह दृष्टिकोण जनता और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच भय को कम करने के लिए तैयार किया गया है

राज्य ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं की वे भविष्य में संक्रमण के खतरे से सुरक्षा के लिए अभी कड़े कदम उठाएं, और यह देखें की आवश्यक दवाइयां और अन्य उपकरण भी संक्रमण को रोकने और इलाज की दृष्टि से किये जाएं।

लखनऊ में ब्लैक फंगस


इसी बीच लखनऊ में शनिवार को ब्लैक फंगस के केजीएमयू में 9 नए मामलों के साथ मार्च से अभी तक 17 मामले दर्ज किये गए हैं। इन 9 मामलों में से 3 को दुसरे अस्पतालों से रेफेर किया गया था, और 5 मरीज़ों को उनके घर पर दिक्कतें शुरू हुईं। एक मरीज़ के लक्षण केजीएमयू के वार्ड में इलाज के दौरान दिखाई दिए।

व्यक्तिगत रूप से, मेडिकल यूनिवर्सिटी के म्यूकोर्मिकोसिस टैली में 13 मामले हैं। इनमें से 7 को कोरोना संक्रमण है, जबकि अन्य महामारी से रिकवर हो गए हैं और अब उनका पोस्ट कोवीड वार्ड में ब्लैक फंगस का इलाज चल रहा हैं, जिसमें एक मरीज़ आईसीयू में भी है। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ सुधीर सिंह के अनुसार, आईसीयू में एक को छोड़कर सभी मरीजों की हालत स्थिर है। आईसीयू के मरीज़ की सर्जरी हुई है जहां ईएनटी ने सभी मृत ऊतक (dead tissue) को हटा दिया है।