शहर की प्रगति को बढ़ावा देने के लिए, लखनऊ विकास प्राधिकरण 17 जून से सिटी डवलपमेंट प्लान (सीडीपी) पर काम करना शुरू कर देगा। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क नेटवर्क में वृद्धि, पार्कों और खुली जगहों में सुधार और ग्रीन कॉलोनी की स्थापना को आगामी योजना में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, शहर के पुराने और नए क्षेत्रों के सुधार के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं की पहचान की जाएगी और उसे सीडीपी में शामिल किया जाएगा।

आगामी 30 वर्षों की शहर की अपेक्षित जरूरतों का पता लगाया जाएगा


नवीनतम शहर विकास योजना के निर्माण के साथ, अधिकारियों का लक्ष्य सार्वजनिक जीवन के विभिन्न पहलुओं में शहर के लिए निरंतर विकास करना है। कथित तौर पर, अधिकारी परियोजना से संबंधित जिम्मेदारियों को संभालने के लिए एक सलाहकार वास्तुकार की मदद लेने की कोशिश कर रहे हैं।

लखनऊ में भी सतत विकास के लिए, आगामी 30 वर्षों में शहर की अपेक्षित जरूरतों और इसको मौजूदा विकास में अंतर का पता लगाया जाएगा। इस अंतर के आधार पर, एक उचित योजना तैयार की जाएगी, जहां विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए विभिन्न परियोजनाओं के लिए अलग-अलग बजट आवंटित किए जाएंगे।

मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट (missing link project) के माध्यम से सड़क नेटवर्क को मजबूत बनाना, सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है, इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट के अन्य उद्देश्यों पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसमें स्वच्छ हवा और पानी उपलब्ध करना और एक कुशल वाटर डिस्पोजल (waste disposal system) सिस्टम लगाना शामिल है। कथित तौर पर, तीनों सुविधाओं से लैस एक आवासीय क्षेत्र को ग्रीन कॉलोनी कहा जाता है, आगे बताया गया है कि यह शहर विकास योजना अयोध्या की सीडीपी के अनुरूप विकसित की जाएगी।

आर्किटेक्ट सलाहकार सभी परियोजनाओं के लिए प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करेगा


आर्किटेक्ट सलाहकार द्वारा योजना तैयार करने के बाद, कार्यान्वयन पर निर्णय लेने के लिए नगर आयुक्त शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। प्री-फिजिबिलिटी (pre-feasibility) आर्किटेक्ट सलाहकार द्वारा ही निर्धारित की जाएगी और वह योजनाओं का सुझाव भी दे सकेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि एलडीए, नगर निगम, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी और अन्य क्षेत्रों के अधिकारी उन परियोजनाओं को देखेंगे जिन्हें सीडीपी में शामिल किया जा सकता है।