बीते शुक्रवार को लखनऊ में 50 से कम कोरोना मामले दर्ज किये गए। लगभग 80 दिनों से कोरोना मामलों की बढ़ती हुई भयंकर संख्या के बाद यह शहर के लिए राहत की खबर है।


रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 40 नए मामले दर्ज किये गए जो की पिछले महीनों की तुलना में सबसे कम संख्या है। इस बीच,162 लोग डिस्चार्ज हुए, जिससे सक्रिय मामले कम होकर 1,334 रोगियों तक आ गए हैं। राज्य की राजधानी में कथित तौर पर अब तक कुल 2,33,944 लोग रिकवर हुए हैं, और 2,486 लोगों ने घातक संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया।

यूपी में इलाज के दायरे को मजबूत करना है लक्ष्य


उत्तर प्रदेश राज्य ने लखनऊ और यूपी भर में मामलों को और कम करने के लिए टीकाकरण कार्यक्रम के दायरे को मजबूत करने के लिए निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य में टीकाकरण अभियान की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाह हैं उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। टीकाकरण में किसी भी चूक या शिकायत के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी टीकाकरण स्थलों को सभी प्रकार के कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा।

1 जून से राज्य भर में कोरोना टीकाकरण अभियान तेज़ी से चल रहा हैं। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सभी जिलों में इस तरह के अभियान की गतिविधियों की बारीकी से निगरानी करेगा। राज्य में आगे लोगों को कोरोना का टीका लगाने के महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए निरंतर जागरूकता अभियान चलाता रहेगा। सीएम के निर्देशों के अनुसार,राज्य में टीकाकरण केंद्रों की संख्या बढ़ाने और की पर्याप्त उपलब्धता पर ध्यान देना शामिल है। यूपी में अब तक 6027 केंद्र कोरोना वायरस का टीका लगा रहे हैं।

कोरोना वायरस की तीसरी लहर से लड़ने के लिए मेडिकल ढांचे को किया जा रहा मजबूत


इसके अलावा, सीएम ने संक्रमण की संभावित तीसरी लहर से लड़ने और जनता को सुरक्षित रखने के लिए 20 जून तक सभी राज्य के जिलों में पीआईसीयू और एनआईसीयू शुरू करने की भी तैयारी की है। इस एजेंडे के तहत प्रत्येक मेडिकल कॉलेज को 100 पीआईसीयू और 50 एनआईसीयू मिल रहे हैं। अन्य अस्पतालों और सीएचसी में अन्य मेडिकल ढांचे के विकास एक साथ चल रहे हैं।

राज्य में 85 ट्रेनिंग केंद्रों पर स्कूल डॉक्टरों, नर्सों और उपस्थित कर्मचारियों को 5 दिनों की पेडियेट्रिक ट्रेनिंग भी दी जायेगी। इस बीच, ओपीडी सेवाएं भी यहां कोरोना उपचार के अलावा, सभी मरीज़ों के लिए सामान्य रूप से उपलब्ध रहेंगी। राज्य ने स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कदम उठाएं हैं।