उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) के तहत लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos Missile) के निर्माण की योजना बनाई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में जल्द ही नेक्स्ट जनरेशन 'ब्रह्मोस मिसाइल' का निर्माण शुरू किया जा सकता है। कथित तौर पर, मंगलवार को ब्रह्मोस एयरोस्पेस (BrahMos Aerospace) के सीईओ व एमडी सुधीर कुमार मिश्र ने यूपी के मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान इस योजना की जानकारी दी। वर्तमान में, देश में नागपुर, हैदराबाद और बिलानी में इन मिसाइलों का निर्माण किया जा रहा है।

परियोजना के लिए 200 एकड़ ज़मीन की मांग की गई


इस परियोजना के शुरू होने से यूपी डिफेंस कॉरिडोर को बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने यह आश्वासन दिया है कि, सरकार इस परियोजना के लिए लखनऊ में आवश्यक भूमि सहित अन्य सभी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। रिपोर्ट के अनुसार, सुधीर कुमार मिश्रा यूपीईडा (UPEIDA) के सीईओ और अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी को पत्र लिखकर ब्रह्मोस मिसाइल बनाने के लिए लखनऊ डिफेंस कॉरिडोर में अपनी परियोजना के लिए 200 एकड़ जमीन की मांग की है। ब्रह्मोस मिसाइल के विभिन्न सिस्टम तथा सब-सिस्टम के निर्माण से जुड़ी 200 से अधिक औद्योगिक इकाइयां भी परियोजना के निकट अपनी उत्पादन इकाइयां भी लगाई जाएंगी।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने यूपीडा के सीईओ अवनीश अवस्थी के साथ हुई बातचीत में बताया कि, लखनई नोड में ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर की स्थापना के लिए 300 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर बनाने का कार्य जल्दी ही शुरू होगा। इन सेंटर में रिसर्च और डेवलपमेंट का कार्य भी होगा। लखनऊ प्रोडक्शन यूनिट से अगले तीन वर्षों में 100 से अधिक ब्रह्मोस मिसाइल बनाने की योजना है।

लोगों को मिलेंगे रोज़गार के नए अवसर


इस परियोजना से रोज़गार के अवसरों में भी बढ़ोत्तरी होगी। कथित तौर पर, इस परियोजना से कुल 5000 लोगों को रोज़गार मिलने की उम्मीद है। इनमें से, ब्रह्मोस प्रोडक्शन सेंटर में करीब पांच सौ इंजीनियर तथा तकनीशियनों को सीधे रोजगार मिलेगा। इसके अलावा करीब पांच हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा और 10 हजार लोगों को इस प्रोडक्शन सेंटर से काम मिलेगा। यह उम्मीद भी की जा रही है कि इस योजना से यूपी डिफेंस कॉरिडोर में डिफेंस सेक्टर में कार्य करने वाले कई अन्य नामी कंपनियां राज्य में आएंगी।

आपको बता दें, ब्रह्मोस एक सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। इसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। यह 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भर सकती है और रडार की पकड़ में नहीं आती है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया (NPO Mashinostroeyenia) तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation) ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी के नाम को मिलाकर इस मिसाइल का नाम ब्रह्मोस रखा गया है।