पिछले दो महीनों में कोरोना के आंकड़ों के लगातार बढ़ने के बाद, उत्तर प्रदेश और राज्य की राजधानी लखनऊ में संक्रमण दर में तेजी से गिरावट आई है। जबकि दूसरी महामारी की लहर का प्रभाव कम होता दिख रहा है। वहीँ मानसून के आने के साथ पानी में उत्पन्न होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए, अधिकारियों ने एन्सेफलाइटिस (Encephalitis) और मलेरिया (Malaria) जैसे संभावित संक्रमणों की संभावनाओं को कम करने के लिए एक राज्य भर में अभियान शुरू किया है।

राज्य में चलाया जाएगा स्वच्छता और फॉगिंग अभियान


कई पहलों के तहत, राज्य के सभी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बीमारियों के प्रकोप को रोकने के लिए नियमित रूप से निगरानी की जाएगी। कहा गया है कि घर-घर मेडिकल किट बांटने के लिए एक केंद्रित योजना शुरू की जाएगी। इसके अलावा, अधिकारियों को यह ध्यान देने के लिए कहा गया है कि दवाओं की कीमत अधिक न हो, जबकि चिकित्सा निगम को दवाओं की क्वालिटी, पैकिंग और सप्लाई की सुविधा को बेहतर करने का निर्देश दिया गया है।

इसके अतिरिक्त, पानी में उत्पान होने वाले रोगों के प्रसार को कम करने के लिए राज्य भर में बार-बार स्वच्छता और फॉगिंग अभियान चलाए जाएंगे। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, यूपी प्रशासन अपेक्षित संक्रमणों से निपटने के लिए जापानी इंसेफेलाइटिस से निपटने की अपनी पुराने अनुभवों का उपयोग करेगा। इसके अलावा, यह अनुभव तीसरी कोरोना लहर के प्रभावों को नियंत्रित करने में भी मदद करेगा।

सभी जिलों में डायलिसिस सेंटर और ब्लड बैंक खोले जाएंगे


जहां पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर प्रत्येक जिले में डायलिसिस केंद्रों को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है, वहीं ब्लड बैंकों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा, सरकार आने वाली तीसरी लहर की आशंकाओं से चिंतित है और इस संबंध में कई उपायों की योजना बनाई गई है।