लखनऊ का अमौसी एयरपोर्ट जल्द बिजली को लेकर पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा। सौर ऊर्जा से यहां लाइटें जगमगाएगी तो इससे ही सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था होगी। इसके लिए 350 करोड़ रुपये की लागत से सोलर पार्क बनाया जाएगा, जो 10 मेगावाट बिजली पैदा करेगा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया के आला अधिकरियों की मानें तो सोलर पार्क बनने से अमौसी हवाई अड्डे पर बिजली को लेकर आत्मनिर्भरता बढ़ जाएगी। यह प्रोजेक्ट साल 2018 में तैयार किया गया था, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका था।


एयरपोर्ट अथॉरिटी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार सोलर पार्क से अतिरिक्त ऊर्जा पावर कारपोरेशन को मिलनी थी। इससे एयरपोर्ट को निर्बाध बिजली मिलती। अब एयर ट्रैफिक कंट्रोल के पास सोलर पार्क बनाने की योजना को जमीन पर उतारने के लिए मंथन शुरू हो गया है। इससे 10 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। सोलर पार्क के लिए पहले चरण में जमीन को समतल तक किया जा चूका था। अब इसके आगे का काम शुरू होगा। अभी एयरपोर्ट के रूफ टॉप सोलर पैनलों से 515 किलोवाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है।

175 एकड़ जमीन रनवे के दक्षिण में मौजूद


रनवे के दक्षिण में एयरपोर्ट के पास 175 एकड़ जमीन है, जहां रहीमाबाद की ओर बॉउंड्री बनाई जानी है। यहीं पर 8 प्लेन के लिए एप्रेन बनाया जा रहा है। यह काम लॉकडाउन में सुस्त था, जो अब गति पकड़ रहा है। श्रेणी 9 का अपग्रेडेड फायर स्टेशन भी यहीं पर तैयार होकर सुविधाएं देगा। भक्तीखेड़ा में रडार बनवाया जा चूका है।

300 एकड़ जमीन रनवे के उत्तर में


एयरपोर्ट रनवे के उत्तर की ओर 300 एकड़ जमीन एयरपोर्ट प्रशासन की है, जिसकी घेराबंदी होनी है। इस जमीन पर विमानों के लिए 8 पार्किंग स्टैंड बनाने का काम चल रहा है। इसके अतिरिक्तयहां सोलर पार्क बनवाया जाएगा। वहीं, एक मेडिकल स्टेशन बनाया जाना है, ताकि यात्रियों को बड़े स्तर का इलाज यहीं मुहैया कराया जा सके। फिलहाल मेडिकल की सुविधा के लिए टर्मिनल में व्यवस्था है।

70 एकड़ जमीन और चाहिए रनवे के लिए


एयरपोर्ट के पास अपनी जमीनें हैं, लेकिन रनवे विस्तार के लिए राज्य सरकार से 70 एकड़ जमीन और चाहिए। अधिकारीयों की मानें तो रनवे की लंबाई करीब 2700 मीटर है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 3500 मीटर करने की योजना है। इसके लिए जमीन का पेंच कई सालों से फंसा है।