लखनऊ को प्रदूषण से रहित करने के लिए और पर्यायवरण को सुधार करने के लिए, इलेक्ट्रिक बसों के ट्रायल रन को राज्य के शहरी विकास मंत्री ने 20 जुलाई को हरी झंडी दिखाई। रिपोर्ट के अनुसार, बसों को जल्द ही राज्य के 14 अन्य शहरों में भी चालू किया जाएगा। लखनऊ में शुरू हुए पायलट प्रोजेक्ट के तहत शहर के कोने-कोने में 10 अलग-अलग रूटों पर 4 बसें चलेंगी। एक बार वर्तमान योजना की सफलता के बाद, अनुमान है कि कुल 700 ई-बसें का संचालन किया जाएगा।

जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे और अन्य सुविधाओं से सुस्सजित बसें


कथित तौर पर, एसी लग्जरी बसों में उन्नत सुरक्षा सुविधाओं के अलावा आलीशान सीटें हैं। ये वाहन जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम, सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन और स्वचालित दरवाजों से सुस्सजित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यात्रियों से पहले चरण के दौरान किसी भी अन्य बस की तरह नियमित शुल्क लिया जाएगा। इसके अलावा, यह बताया गया है कि राजधानी में जल्द ही 5 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। एक पूर्ण चार्जिंग राउंड के बाद, बसें 45 मिनट में 120 किमी तक काम कर सकती हैं।.

लखनऊ के अलावा कानपुर, आगरा, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद, मेरठ, झांसी, अलीगढ़, मुरादाबाद, बरेली, मथुरा, वृंदावन, गोरखपुर और शाहजहांपुर को भी बिजली से चलने वाली ये बसें मिलेंगी। रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना पर ₹900 करोड़ से अधिक खर्च किए जाएंगे और प्रत्येक ऑपरेटर को ₹45 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। परियोजना के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद लखनऊ में करीब 100 बसों को तैनात किया जाएगा।

प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद करेंगे ई-वाहन


शहर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए इन पर्यावरण के अनुकूल वाहनों के जुड़ने से ध्वनि और वायु प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, बसों में अन्य आधुनिक सुविधाओं होंगी जैसे कि अडजस्टेबल सीटें और अन्य चीजों के साथ चार्जिंग सुविधाएं। आप यहां क्लिक करके ट्रायल रन के 10 मार्गों की जांच कर सकते हैं!