उत्तर प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि राज्य के सभी बच्चे जो कोविड के कारण अपने माता-पिता दोनों को खो चुके हैं, ऐसे बच्चों क आश्रय घरों में रखा जाएगा। इस संबंध में, महिला और बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव (Principal Secretary) ने सभी जिला-स्तरीय अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं। उन्हें ऐसे सभी अनाथ बच्चों की एक सूची तैयार करने के लिए कहा गया है, जिसके बाद प्रशासन उनके ठहरने के लिए व्यवस्था करेगा।

निग्रानी समितियां बच्चों की पहचान करने में मदद करेंगी


रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों को 15 मई तक सभी संबंधित जानकारी एकत्र करने के लिए कहा गया है। जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए गए रिकॉर्ड को बाल अधिकार संरक्षण आयोग के साथ भी साझा किया जाएगा। निर्देश के अनुसार, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निग्रानी समितियों को महामारी से प्रभावित बच्चों को खोजने के लिए तैनात किया जाएगा। ग्रामीण इलाकों में, ग्राम प्रधान के नेतृत्व में निगरानी समितियां कार्य करती हैं। इनमें आंगनबाड़ी कर्मचारी और आशा कार्यकर्ता शामिल हैं, जो अब अनाथ बच्चों को ढूंढने में मदद करेंगे। इसके अलावा, चाइल्डलाइन सेवा से एकत्र की गई जानकारी भी ऐसे बच्चों की पहचान करने में भी मदद करेगी। पहचान होने के बाद, इन बच्चों को जिला प्रोबेशन अधिकारी के माध्यम से बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया जाएगा। इसके बाद, बच्चों को नामित आश्रय घरों में भेजा जाएगा। वैसे तो ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए एक अलग हेल्पलाइन नंबर- 011-234782250 शुरू किया गया है, लेकिन नागरिक 1098 (चाइल्डलाइन) या 181 (महिला हेल्पलाइन) पर भी कॉल कर सकते हैं और ऐसे किसी बच्चे की जानकारी दे सकते हैं।

बिना किसी बाल आश्रय गृह वाले जिलों में 'वन स्टॉप सेंटर' का उपयोग किया जाएगा


मुख्य सचिव ने यह भी बताया है कि ऐसे शहरों में जहां किशोर आश्रय गृह नहीं है, 10 साल से कम उम्र के अनाथ बच्चों को वन-स्टॉप सेंटर पर लड़कियों के साथ रखा जा सकता है। केंद्र में जाने से पहले, बच्चे को एक कोविड परीक्षण से गुजरना होगा। नतीजतन, सभी बाल आश्रय घरों को सभी नए प्रवेशकों के टेस्ट और संक्रमण की संभावना को कम करने के लिए, स्वास्थ्य विभाग से रैपिड एंटीजन किट प्रदान किया जाएगा।

यदि बच्चा 10 वर्ष से अधिक आयु का है, तो उसे अस्थायी रूप से क्वारंटाइन सेंटर में रखा जाएगा और जिला प्रोबेशन अधिकारी आवश्यकता होने पर उनकी सुरक्षा, भोजन, देखभाल और किसी भी उपचार का ख्याल रखेंगे। इस महामारी के दौरान, इन बच्चों ने बहुत कष्ट सहा है और अपना परिवार गवां दिया इसलिए इनकी देखभाल करना सभी के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।