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स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में लखनऊ को प्रथम स्थान पर लाने के लिए शुरू हुआ स्वच्छता अभियान।
नगर निगम ने मंगलवार को शहर के कई क्षेत्रों से निर्माण कार्य से उत्पन्न मलबे को किया साफ।
लखनऊ में प्रतिदिन लगभग 1,500 से 2,000 टन तक निर्माण अपशिष्ट होता है उत्पन्न।
सड़क पर पड़े मलबे को डंप करने वाले लोगों पर 3,000 रुपये का लगाया गया जुर्माना।
लखनऊ के दो वार्डों में एक समर्पित अपशिष्ट प्रबंधन पायलट परियोजना भी करी गयी शुरू।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2022 में लखनऊ को प्रथम स्थान पर लाने के लिए लखनऊ नगर निगम ने शहर में स्वच्छता अभियान की शुरआत कर दी है। इस अभियान के माध्यम से नगर निगम ने मंगलवार को लालबाग, गोमती नगर, महानगर, मालवीय नगर और चौक क्षेत्रों में निर्माण कार्य से उत्पन्न मलबे को साफ किया है। कथित तौर पर, निर्माण कार्य से उत्पन्न मलबे के कुप्रबंधन के लिए अपराधियों को दंडित भी किया जाएगा।

राजधानी में प्रतिदिन 1500 टन से अधिक मलबा होता है उत्पन्न

कथित तौर पर, लखनऊ में प्रतिदिन लगभग 1,500 से 2,000 टन तक निर्माण अपशिष्ट उत्पन्न होता है। ईंट, सीमेंट, पत्थर, गारा और अन्य निर्माण सामग्री से उत्पन्न मलबा न केवल गलियों में गंदगी फैलाता है बल्कि प्रदूषण बढ़ाने में भी प्रमुख कारण बनता है। इसके अलावा सड़क पर पड़े मलबे के अतिक्रमण के कारण यातायात के संचालन में भी बाधा उत्पन्न होती है।

इस सफाई अभियान को सफल बनाने के लिए नगर निगम ने सड़क पर पड़े मलबे को डंप करने वाले लोगों पर 3,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। नॉकसेंस से बात करते हुए लखनऊ नगर निगम के अधिकारी श्री दिलीप मौर्य ने बताया कि, “सड़कों की सफाई सुनिश्चित करने के लिए यह स्वच्छता अभियान बार-बार चलाया जाएगा।”

लखनऊ नगर निगम, इस पहल को आगे बढ़ा रही है और 2022 में वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष रैंक हासिल करने के लिए सख्त कदम उठा रही है। इस पहल के अतिरिक्त, नगर निगम ने लखनऊ के दो वार्डों में एक समर्पित अपशिष्ट प्रबंधन पायलट परियोजना भी शुरू की है। इसके अलावा, नगर निगम शहर में अलग-अलग कचरे के निपटान के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए विशेष स्वच्छता अभियान चलाने की भी योजना बना रहा है।

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