लखनऊ विकास प्राधिकरण (लविप्रा) अपनी योजनाओं में आने वाले समय में ऐसी सड़कें बनाएगा, जिनके रखरखाव पर न तो एक पैसा खर्च करना पड़ेगा और न ही समय-समय पर इन्हें मरम्मत करने की जरूरत होगी। ऐसी सड़कें लविप्रा ने ट्रांसपोर्ट नगर योजना में प्रयोग के आधार पर बनाई हैं। जहां 40-45 साल तक चलने वाली इन सड़कों की गुणवत्ता अच्छी है, वहीं हजारों ट्रक प्रतिदिन रिजिड पेवमेंट सड़क पर चल रहे हैं। लविप्रा ऐसी सड़कों के निर्माण में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआइ) की मदद ली है।

जल्द ही पूरे ट्रांसपोर्ट नगर में बनाई जाएंगी ऐसी रोड

लखनऊ विकास प्राधिकरण के मुख्य अभियंता इंदू शेखर सिंह कहते हैं कि इन सड़कों के बनने से मरम्मत पर खर्च होने वाला पैसा प्राधिकरण का बचेगा। शुरू में रिजिड पेवमेंट की सड़कों पर लागत जरुर थोड़ी ज्यादा आती है लेकिन चार से पांच दशक चलने वाली सड़कों की मजबूती, गुणवत्ता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता, क्योंकि सभी मानकों को देखकर सड़कों का निर्माण किया गया है। अब स्थानीय ट्रांसपोर्टर ऐसी ही सड़कों का जाल पूरे ट्रांसपोर्ट नगर योजना में बिछाने की मांग कर रहे हैं। क्योंकि ट्रांसपोर्ट नगर योजना की अधिकांश सड़कों का हाल बुरा है और बड़े-बड़े गड्ढे बताते हैं कि सड़कों की गुणवत्ता पहले कैसी रही होगी। वहीं प्रधानमंत्री आवास के अंतर्गत शारदा नगर योजना और बसंत कुंज योजना में बनाए गए फ्लैटों के आसपास लविप्रा ने रिजिड पेवमेंट की सड़कों का निर्माण कराया है, जो लोगों को पसंद आई है।

मुख्य अभियंता कहते हैं कि सड़कों के निर्माण और उनकी गुणवत्ता को जांच के लिए प्राधिकरण की एक पूरी टीम काम करती है और संबंधित उपकरण से उनकी गुणवत्ता देखी जाती है। करीब 20 से 28 दिन में सड़क की मजबूती का सही आंकलन ठंडियों में निकाला जा सकता है। उनके मुताबिक बजट को देखते हुए भविष्य में ऐसी सड़के लविप्रा अपनी योजनाओं में बना सकता है, क्योंकि पहली व दूसरी बरसात में इनकी बजरी नहीं उखड़ती और रिजिड पेवमेंट से जुड़ी सड़के लंबे समय तक चलती हैं।

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