दीपावली के पावन अवसर पर लखनऊ में त्योहारी धूमधाम ज़ोरो शोरों से नज़र आ रही है। शहर में आयोजित कराये जा रहे अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं उत्सव इस बात के गवाह हैं की शहर अपने संस्कृति और पारम्परिक परिवेश को आगे बढ़ाने के प्रयासों में लगा हुआ है। इसी त्योहारी उल्लास के चलते उत्तर प्रदेश के माटीकला बोर्ड ने 25 अक्टूबर से 3 नवंबर तक लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित संगीत नाटक अकादमी में 10 दिवसीय माटीकला मेला आयोजित किया है। प्रदेश के खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने 27 अक्टूबर को औपचारिक रूप से मेले का उद्घाटन किया। इसी के साथ इस कार्यक्रम में यूपी मटीकला बोर्ड की नई वेबसाइट का भी शुभारंभ किया गया।

मिट्टी के बर्तनों की कला और कलाकारों का महत्त्व

मिट्टी के बर्तन बनाने की कला में लगे कारीगरों को एक मंच प्रदान करने के सरल उद्देश्य से लखनऊ माटी कला उत्सव का आयोजन किया गया है। दिवाली से ठीक पहले आयोजित यह उत्सव प्रदर्शनी न केवल मिट्टी से बनी वस्तुओं की बिक्री को बढ़ावा देती है बल्कि लखनऊ के विभिन्न राज्यों के जिलों से एकत्र हुए कारीगरों को भी इस कला को जीवित रखने के लिए प्रोत्साहित करती है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (खादी एवं ग्रामोद्योग) नवनीत सहगल ने कहा कि मटीकला मेले में प्रदेश के विभिन्न जिलों के पारंपरिक कारीगरों द्वारा बनाए गए मिट्टी से बने उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री की जा रही है।

प्रदर्शनी में करीब 100 स्टॉल लगाए गए हैं। मटीकला कारीगरों को नि:शुल्क स्टॉल आवंटित किए गए हैं।उन्होंने आगे बताया कि माटीकला से सम्बंधित सभी प्रकार के उत्पाद मेले में उपलब्ध हैं। मेले में राजधानी गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, आजमगढ़, मिर्जापुर, चंदौली, उन्नाव, कुशीनगर, आगरा और प्रतापगढ़ सहित कई अन्य जिलों के कारीगरों ने स्टॉल लगाकर अपनी कला प्रस्तुत की।

इसके अलावा,महोत्सव में दर्शकों के सामने मिट्टी के बर्तनों की प्रक्रिया के लाइव प्रदर्शन को दर्शाने वाला एक समर्पित स्टॉल भी है। इसलिए उत्सव के दौरान, आप बिजली से चलने वाली मोटरों और अन्य उपकरणों की मदद से मॉडलिंग के प्रारंभिक चरण से लेकर अंतिम चरण तक की पूरी प्रक्रिया देख सकते हैं।

दीपावली में मूर्तियां और मिट्टी से बने अन्य उत्पाद खरीदकर कलाकारों का हौंसला बढ़ाएं

मिट्टी से बनी डिजाइनर मूर्तियां, चुनार की मिट्टी के बर्तन, आजमगढ़ की काली मिट्टी के बर्तन, गोरखपुर की टेराकोटा, खुर्जा की चमचमाती मिट्टी के बर्तन सहित कई डिजाइनर उत्पाद मौजूद हैं जो यहां का मुख्य आकर्षण है। दीपावली के अवसर पर दीपावली के दीये, गणेश लक्ष्मी की मूर्तियाँ, मिट्टी के गृह सज्जा के सामान यहाँ से खरीदें और वोकल फॉर लोकल के तहत इन मेहनती हस्तशिल्प कारीगरों के उत्पाद खरीदकर उनका उत्साह और जीवन में योगदान करें।

आगंतुकों की सुरक्षा को अच्छी तरह से प्राथमिकता दी गई है और प्रवेश द्वार पर, COVID-19 दिशानिर्देशों का विवरण देने वाले बैनर और हेल्प डेस्क की जानकारी लगाई गई है।

एंट्री निःशुल्क है

स्थान – संगीत नाटक अकादमी, गोमती नगर लखनऊ।

 

 

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