राजस्थान की संस्कृति अनोखी और ऐतिहासिक अतीत के समान रंगीन है। राजस्थानी संस्कृति राज्य के रंगीन इतिहास को दर्शाती है। लोगो को अपनी लोक नृत्यों, पारंपरिक व्यंजनों, राजस्थान के लोगों और उनके रोजमर्रा के जीवन में संस्कृति का सार मिल सकता है। एक राजसी राज्य होने के नाते, राजस्थान अपने शाही भव्यता और रॉयल्टी के लिए जाना जाता है। यह अपनी सुंदर परंपराओं, संस्कृति, लोगों, इतिहास और स्मारकों के साथ दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती है।

राजस्थान कई विरोधाभासों का देश है और अब यहां राज्य मंडावा आर्ट विलेज नामक दुनिया की सबसे बड़ी ओपन मॉडर्न आर्ट गैलरी खुलने के लिए पूरी तरह से तैयार है। कला और विरासत के विशेष वातावरण से सजी यह गैलरी रेगिस्तान, अलंकृत हवेलियों, समृद्ध रूप से तैयार किए गए कपड़े, ऊंट, रेत और राजस्थान को शोभायमान करने वाली हर एक चीज से चमकेगी।

नौकरियों को बढ़ावा देने और माइग्रेशन को रोकने के लिए स्थानीय कला केंद्र

मंडावा आर्ट विलेज (Mandawa Art Village) की फ्रांसीसी सह-संस्थापक अमिता डी एलेसेंड्रो ने कहा, ” हमारा विचार यह है की हम रचनात्मक अर्थव्यवस्था के माध्यम से गांव में रहने वाले लोगों को रोज़गार के स्थानीय विकल्प प्रदान कर सकें।” जहां इस कला परिसर के माध्यम से स्थानीय कला और संस्कृति संरक्षित की जा सकेगी, वहीं रोजगार के अवसर पैदा होने से गांव के लोगों को कई लाभ होंगे। कलात्मक पर्यटन के विकास से ग्रामीण लोग आर्थिक सीढ़ी पर चढ़ सकेंगे और माइग्रेशन का रेट कम होगा।

दिल्ली स्थित एक फोटोग्राफी क्लब डीपीसी के डायरेक्टर और संस्थापक वीरेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “हम मंडावा आने वाले पर्यटकों को एक और आकर्षण प्रदान करने के लिए इसे एक अंतरराष्ट्रीय आर्ट विलेज में बदलना चाहते हैं। स्थानीय पुराने कला रूपों को वापस शुरू करना, संरक्षित करना और बढ़ावा देना भी हमारा एक उद्देश्य है।” यहां उपलब्ध कई गतिविधियों के बीच पर्यटकों को मिट्टी के बर्तनों को बनाने से लेकर फोटोग्राफी तक कई तरह के कौशल सिखाए जाएंगे।

दुनिया भर के कलाकारों द्वारा वॉल पेंटिंग और स्ट्रीट आर्ट

यहां की कुछ हाइलाइट्स में से एक अंतरराष्ट्रीय स्ट्रीट आर्ट और मंडावा हेरिटेज फ्रेस्को हैं, जिन्हें विदेशी और देशी दोनों पर्यटकों के हिसाब से बनाया गया है। दुनिया भर के कलाकारों ने अपनी मातृभूमि और भारतीय जीवन शैली से प्रेरित होकर अपना योगदान दिया है। इसमें पेरू और मोरक्को के विशेषज्ञ चित्रकार शामिल हैं, जिन्होंने जगह की कलात्मक अपील को बढ़ाने के लिए काम किया है।

मंडावा से 4 किमी की थोड़ी दूरी पर स्थित, गांव खूबसरत हवेलियों से घिरा हुआ है। इसके अलावा, प्रसिद्ध विदेशी कलाकारों, फोटोग्राफी प्रदर्शनियों, कला प्रतिष्ठानों और मूर्तिकला, फोटोग्राफी और कला कार्यशालाओं, लोक संगीत समारोहों, लोक नृत्य द्वारा बनाए गए कला रूपों से बहुत सारे पर्यटकों के आकर्षित होने की उम्मीद है।

पेरू, इक्वाडोर और मेक्सिको की एम्बसी के समर्थन से

इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण कला के रूप और देसी कौशल की सूरत को बदलना है। यह योजना रोजगार के नए रास्ते को सुगम बनाने और रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा देने के लिए कार्य करेगी। गांव के लोग पहले ही फोटोग्राफी और अन्य कक्षाओं को चलाने के लिए अपने कमरों को देने के लिए तैयार हैं। आने वाले दिनों में इस योजना को गति मिलने की उम्मीद है।

जबकि इस परियोजना के 2021 तक समाप्त होने की उम्मीद थी, महामारी ने समयरेखा को 2 साल बढ़ा दिया है। बताया गया है कि पेरू, इक्वाडोर और मैक्सिको के कलाकारों को भारत आने की अनुमति देकर इस परियोजना का समर्थन किया है। देश में अपनी तरह की पहली योजना होने के नाते, इस आर्ट विलेज का विज्ञापन ग्लोबल प्लेटफार्मों पर राजस्थान पर्यटन द्वारा किया जाएगा। 

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