राजस्थान के बगरू के स्थानीय छिप्पा समुदाय की चौथी पीढ़ी के ब्लॉक प्रिंटर सूरज नारायण तीतानवाला ने एक बड़ा सपना देखा। एक अनोखे टेक्सटाइल संग्रहालय को स्थापित करने का सपना जो प्राकृतिक रंगों के साथ हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग की उनकी पारिवारिक परंपरा को संरक्षित किया जा सके। ईमानदार इरादों और मेहनतकश प्रयासों की डोर से बंधा यह सपना जुलाई 2019 में साकार हो गया जब तीतानवाला संग्रहालय का उदघाटन हुआ। 

अपनी ऐतिहासिक संस्कृति को संजोने का सपना

तीतानवाला संग्रहालय राजस्थान में ब्लॉक प्रिंटिंग के केंद्र बगरू के छिप्पा समुदाय के अनुयायियों द्वारा वर्षों से की जाने वाली हाथ की ब्लॉक प्रिंटिंग परंपरा को प्रदर्शित करता है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सूरज नारायण तीतानवाला ने 1990 के दशक में अपना खुद का संग्रहालय बनाने के विचार की कल्पना की, जब उन्हें प्रिंटिंग प्रदर्शन आयोजित करने के लिए टोक्यो-जापान में हिरोको इवाटे के लोक वस्त्र संग्रहालय का दौरा करने का अवसर मिला।

जयपुर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बगरू हर साल भारत और विदेशों में फैशन हाउसों को हजारों मीटर ब्लॉक प्रिंटेड कपड़े की सप्लाई करता है। कपड़ा जो परंपरागत रूप से ग्रामीण समुदायों द्वारा पहना जाता था, अब अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों द्वारा अच्छी तरह से मांगा जाता है, जिनकी बगरू और जयपुर में अपनी प्रोडक्शन यूनिट्स और डिजाइन स्टूडियो हैं। तीतानवाला संग्रहालय बगरू प्रिंटिंग उद्योग के विकास को दर्शाता है और डार्क इंडिगो बैकग्राउंड पर प्लांट मोटिफ्स के ब्लॉक प्रिंटिंग के शिल्प को प्रदर्शित करता है; जो बगरू प्रिंट की खासियत है।

संग्रहालय की गैलरियां जो ब्लॉक प्रिंटिंग के अतीत में ले जाती हैं

संग्रहालय में बगरू प्रिंटिंग की कई प्रकार की किस्में प्रदर्शित हैं। जिसमें,जमरडी एक ऐसी जटिल छपाई तकनीक है जिसे यहाँ प्रदर्शित किया गया है। संग्रहालय में प्रिंट वस्त्र, लकड़ी के ब्लॉक, बर्तन और शिल्प में उपयोग किए जाने वाले औजारों के वास्तविक नमूने हैं। विशेष आकर्षण 300 साल पुराने पुश्तैनी लकड़ी के ब्लॉक और प्रिंट नमूने हैं जो 1974 से टाइटनवाला द्वारा संरक्षित हैं। संग्रहालय में दो गैलरीज हैं। पहली गैलरी लकड़ी के ब्लॉक बनाने की कला में एक गहन दृष्टि प्रदान करती है जो खराड़ी समुदाय द्वारा प्रचलित है- इस प्रक्रिया में उपयोग किये जाने वाले प्राकर्तिक रंग जैसे अनार के छिलके, हल्दी, घोड़े की नाल का जंग, इमली आदि, और विभिन्न उपकरण, बर्तन और अन्य प्रिंटिंग के लिए उपयोग की जाने वाली वस्तुएँ। यहां प्रदर्शित नमूने कपड़े पर प्रत्येक डाई के प्रभाव को दर्शाते हैं।

दूसरी गैलरी में पुराने लकड़ी के ब्लॉक हैं जो सूरज टाइटनवाला के परिवार की विरासत हैं, जो चार पीढ़ियों से चली आ रही हैं। विभिन्न आकृतियों, आकारों और डिजाइनों के ब्लॉक वर्षों से बदलती जरूरतों और परंपराओं को व्यक्त करते हैं- इस गैलरी में विशेष कृष्णा ब्लॉक एक प्रमुख आकर्षण है।

जो चीज इस संग्रहालय को अन्य संग्रहालयों से अलग करती है, वह है डाई तैयार करने की वास्तविक प्रक्रिया, रंगाई, छपाई, धुलाई और सुखाने का कार्य, जैसा कि तीतानवाला अपने काम के बारे में बताते हैं। वे कार्यशालाओं की भी आयोजित करते हैं। कोई भी व्यक्ति यहाँ से सिग्नेचर बगरू प्रिंट भी खरीद सकता है। 

नॉक नॉक 

तीतानवाला संग्रहालय बगरू की विरासत को एक छोटे से संग्रहालय की दीवारों के भीतर सावधानीपूर्वक संरक्षित करने का उल्लेखनीय कार्य है। एक शांत हाल में खोला गया तीतानवाला संग्रहालय, ब्लॉक प्रिंटिंग की कला की खोज करता है और सूरज नारायण और उनके परिवार के अद्वितीय संग्रह को प्रदर्शित करता है। अपने शिल्प को संरक्षित करने का सूरज जी का दृढ़ निश्चय आज बगरू कपड़े की तलाश में कपड़ा उत्साही, डिजाइनरों, कलेक्टरों और शिक्षाविदों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन गया है।

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