1090 चौराहा पर स्थित शहर की फेमस 'चटोरी गली' का ज़िक्र किये बिना लखनऊ के स्ट्रीट फूड के बारे में बातचीत अधूरी ही है। हालाँकि, महामारी ने हम सब लखनऊवासियों के लज़ीज़ सपनों पर पानी फेर दिया और चटोरी गली भी अब तक सुनसान थी। शाम के समय में जहां कभी युवा और बूढ़े दोनों एक समान हलचल मचाते नज़र आते थे, वह स्थान अब एक बार फिर से अपनी पूरी चकाचौंद और लज़ीज खाने के साथ शाम का लुफ्त उठाने आये लोगों का स्वागत करने के लिए तैयार है।

21 जून पूरी तरह अनलॉक के बाद से काम करने के लिए आवश्यक अनुमति मिलने के बाद, लखनऊ की प्रसिद्ध चटोरी गली में सभी स्ट्रीट फ़ूड वेंडर्स ने अपनी अपनी दूकान लज़ीज पकवानों के साथ खोल दी है। कई वेंडर्स दूध की हांडी को उबालते हुए, तंदूरों को पंखा करते हुए, तवे को गर्म करते हुए दिखाई दिए। मनमोहक सुगंध के साथ, इस फ़ूड स्ट्रीट के व्यवसाय के पहले दिन में भारी संख्या में लोग आए, हालांकि गिनती महामारी के पहले के समय से मेल नहीं खाती ।

चटोरी गली के फ़ूड वेंडर्स के लिए जुलाई लाया है उम्मीद की किरण


अब तक, लॉकडाउन के सख्त नियमों और महामारी के नतीजों के कारण, ये स्थानीय फ़ूड वेंडर्स बेरोजगार हो गए थे और उनके पास कोई भी आय का स्त्रोत नहीं था, जिससे उनमें भय और अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई थी। लेकिन जुलाई आने के साथ, दूसरी लहर घट रही है और कई कर्फ्यू में ढिलाई आने के बाद चटोरी गली में फ़ूड वेंडर्स को उम्मीद है कि उनके व्यवसाय जल्द ही एक बार फिर उजागर होंगे।


इसके अलावा, निवासियों को और अधिक शामिल करने और बिक्री को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं, ताकि उनके दैनिक रोज़ी रोटी पर ध्यान दिया जा सके, इसी कारण यहां के अधिकांश स्ट्रीट फूड विक्रेताओं ने अपनी कीमतों में वृद्धि नहीं करने का फैसला किया है।

अपेक्षित तीसरी लहर से वेंडर्स को सता रहा डर


हालांकि शहर में स्थिति बेहतर होती दिख रही है, लेकिन चटोरी गली के विक्रेताओं ने नए वायरस के तनाव और संभावित तीसरी लहर के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की है, जिसका मतलब है की फिर से व्यापार के अचानक बंद हो सकता है। फिर भी, व्यवसाय के मालिक अभी भी आने वाले दिनों में बिक्री में लगातार सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।


कोरोना के हावी होने से पहले, चटोरी गली में 50 से अधिक स्ट्रीट फूड वेंडर थे और वर्तमान में, यह संख्या कम हो गई है, लेकिन लोगों को प्यार से खिलाने की भावना अब भी वैसे ही बरक़रार है। स्टॉल सोमवार से शुक्रवार तक शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक चालू रहते हैं.

कोरोना उपयुक्त व्यवहार समय की ज़रुरत है


हम समझते हैं कि चटोरी गली में घूमने और यहां के लज़ीज़ खाने का आनंद लेने से खुद को रोक पाना बहुत मुश्किल है और इस समय स्थानीय विक्रेताओं का समर्थन करना भी समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है! लेकिन यह भी महत्वपूर्ण है कि खुले में बाहर रहने के आनंद का आनंद लेते हुए सभी जारी मानदंडों का पालन किया जाए।

चटोरी गली में कई लोगों को बिना मास्क के देखा गया है, जो अन्य जारी किए गए कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए पाए गए थे। ऐसा ही नजारा शहर के प्रसिद्ध भूतनाथ मार्केट में भी देखा गया, जहां लोग सामान लेने के लिए इधर-उधर घूमते थे और इस स्थान पर उपलब्ध स्ट्रीट फ़ूड में खाते पीते नज़र आये।


यह हमें फिर यह याद दिलाता है कि महामारी के प्रभाव इस बीच थोड़े हलके ज़रूर हुए हैं लेकिन स्थिति अभी तक संभली नहीं है और निश्चित रूप से एक तीसरी लहर अभी दस्तक देने को है। 'अनलॉक' के साथ हम सब पर एक बड़ी ज़िम्मेदारी है इसलिए मास्क लगाइये, सैनिटाइज़ करें और अजनबियों से दूरी बनाए रखिये चाहे महामारी के प्रभाव कम हों या ज़्यादा।