इस महामारी के चलते निरंतर लगने वाले लॉकडाउन और प्रतिबंधों से हमारा जीवन जैसे एक जगह ठहर सा गया है, और हम सभी इस शहर में अपनी पसंदीदा चीज़ों से दूर रहने पर मजबूर हैं। अपने परिवार और दोस्तों के साथ बाहर जाना, शहर में अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों का लुत्फ उठाना और यहां की खूबसूरत जगहों पर समय बिताना, हम सभी को बहुत याद आता है। शहर से जुड़ी सभी बेहतरीन चीज़ें हमारी यादों में बसी हुई हैं, और हम सभी उन सभी खूबसूरत क्षणों को दोबारा जीने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। हमने यहां कुछ ऐसी ही चीज़ों की सूची बनाई है, जिनका आनंद दोबारा उठाने के लिए हम सभी महामारी के समाप्त होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

गंज की गलियों में घूमना


हज़रतगंज में शॉपिंग करना, नाना प्रकार के व्यंजनों का लुत्फ उठाना, और यहां की गलियों में घूमते हुए अवध की सुकून भरी शाम को देखना निश्चित रूप से हम सभी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। हम सभी हज़रतगंज में अपने दोस्तों या परिवार के साथ फिर से घूमना चाहते हैं, यहां की गलियों से आने वाली खाने की खुशबू से मोहित होना चाहते हैं और इस जगह की सुंदरता को फिर से अपनी आंखों में कैद कर लेना चाहते हैं।

टुंडे कबाब को दोबारा चखना


लखनऊ शहर यहां के कबाब और नवाब दोनों के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। जब भी लखनऊ का जिक्र होगा, ऐसा संभव ही नहीं है की हम टुंडे कबाब की बात न करें, यहां के गलौटी कबाब और बिरयानी का स्वाद, लखनऊ के हर उस व्यक्ति के दिल में बसा है जो खाने का शौकीन है। टुंडे कबाब यहां की पाक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, और इसलिए हम लोग इससे ज्यादा दिन दूर नहीं रहना चाहते।

थिएटर में पिक्चर देखना


अब हम सभी अपनी मोबाइल, टीवी और लैपटॉप स्क्रीन पर पिक्चर देखकर बोर हो चुके हैं। थिएटर में अपने पसंदीदा स्नैक्स का आनंद लेते हुए, बड़ी स्क्रीन पर मूवी देखने का अलग ही मज़ा होता है। हम सभी को इसलिए इंतज़ार है सूने पड़े थिएटरों के दोबारा खुलने का और वहां जाकर अपने प्रियजनों के साथ पिक्चर देखने का।

शर्मा जी की चाय की चुस्की


शहर के हर गली-नुक्कड़ पर आपको एक चाय की दुकान मिल जाएगी, लेकिन शर्मा जी की चाय की बात ही कुछ और है! शर्मा की दुकान पर चाय की चुस्की लेते लोग, दोस्तों की हँसी-ठिठोली और लोगों की कभी न खत्म होने वाली बातें, इस जगह की रौनक को बढ़ा देती है। यह सभी चीज़ें यहां पर चाय पीने के अनुभव को और भी खास बनाती हैं, इसलिए हम दिन गिन रहे की कब हम यहां पर गरम समोसे और बन मक्खन के साथ चाय का लुत्फ उठा सकेंगे।

इदरीस की बिरयानी


एक प्लेट गरम बिरयानी किसी के भी दिन और मूड को बेहतर बना सकती है। लखनऊ में बिरयानी का नाम सुनते ही ज़हन में इदरीस बिरयानी का नाम ज़रूर आता है, अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो कभी बिरयानी को न नहीं बोल सकते तो निश्चित रूप से आप इदरीस बिरयानी के स्वाद को दोबारा चखने का इंतज़ार कर रहे होंगे।

प्रकाश कुल्फी


इस बात का हम सभी को दुख है कि इस गर्मी में भी हम लोग प्रकाश कुल्फी की स्वाद नहीं चख पा रहे हैं। चाहे कोई बच्चा हो या कोई बड़ा, प्रकाश की कुल्फी और फालूदा को खाते ही सभी का मन प्रसन्न हो जाता है। यह सोच कर ही हम सभी के चहरे पर मुस्कान आ जाती है की स्थिति बेहतर होने के बाद, हम फिर से अपनी पसंदीदा कुल्फी को खा पाएंगे।

एसबीआई का पान


रात के खाने के बाद लोंग ड्राइव पर जाना और फिर एसबीआई की पान की दुकान पर कुछ देर रुक पर पान का आनंद लेना कई लोगों को याद आता होगा! हम में से कई लोगों ने अपने दोस्तों या साथी के साथ यहां देर रात कुछ पल बिताए होंगे और एक बार फिर से उन पलों को दोबारा जीने की इच्छा ज़रूर होती होगी।

दस्तरख्वान में भुना गोश्त का आनंद लेना


दस्तरख्वान के ज़ायकेदार भुना गोश्त और लच्छा पराठे का स्वाद कोई भी व्यक्ति भूल नहीं सकता जो मुगलई खाने से बेहद प्यार करता है। यहां के लज़ीज़ भुना गोश्त का स्वाद लोगों को बार-बार इसे खाने पर मजबूर कर देता है। हम जानते हैं मुगलई खाने से प्रेम करने वाले लोगों के लिए यहां खुद को जाने से रोक पाना कितना मुश्किल होगा, हम उम्मीद करते हैं कि यह इंतज़ार जल्द से जल्द खत्म हो जाए।

दोस्तों के साथ गोलगप्पे खाना


गोलगप्पों से दूर रहना हम सभी के लिए बेहद मुश्किल है। दोस्तों के साथ बाहर जाकर खट्टे-मीठे पानी वाले गोलगप्पे खाने में जो खुशी मिलती थी वो और कहीं नहीं मिल सकती। गोलगप्पों का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाता है और मन ललचने लगता है, ये हमारा दिल ही जानता है कि कैसे हम लोगों ने गोलगप्पों के बिना इतने दिन काटे हैं, इसलिए जैसे ही हालात सामान्य हो जाएंगे, हम में से कोई भी इनको खाने का मौका नहीं छोड़ेगा।

गोमती रिवरफ्रंट पर टहलने जाना


गोमती नगर रिवरफ्रंट लखनऊ की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। चाहे आपको दोस्तों के साथ घूमना हो, या कुछ समय अकेले बिताना हो या फिर अपना फोटोशूट करवाना हो, यह जगह आपको कभी निराश नही करेगी। गोमती नदी के किनारे ढलते हुए सूरज को देखना और टहलने जाना एक बहुत खूबसूरत अनुभव है और हमें आशा है कि यह जल्द ही दोबारा संभव हो पाएगा।

उद्यानों में घूमने जाना


इस शहर में अनेक खूबसूरत उद्यान हैं और हर उम्र के लोग इन उद्यानों की सैर करने ज़रूर जाते थे। कुछ लोग सुबह-शाम टहलने जाते हैं, और कुछ लोग बस शहर की भीड़-भाड़ से दूर शांति में प्रकृति की गोद में अपना समय व्यतीत करने जाते हैं। इन उद्यानों की रौनक भी इस समय फीकी पड़ गई है और हम सभी चाहते हैं कि इन पार्कों में चहल-पहल वापिस आ जाए।

बाहर खेलने जाना


सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से आउटडोर खेलों पर असर पड़ा है। इस सब से वह लोग बहुत प्रभावित हुए है जो लोग खेल गतिविधियों में लगातार भाग लेते हैं और घर पर ज्यादा समय तक बैठ नहीं सकते। इस महामारी से उबरने के बाद ऐसे सभी लोग फिर से मैदानों में अपने पसंदीदा खेल को खेलने का आनंद उठा पाएंगे।

जिम में कसरत करना


इस लॉकडाउन में सभी जिम बंद हो गए हैं, इसलिए लोग इंस्टाग्राम पर वर्कआउट वाली सेल्फी पोस्ट भी नहीं कर पा रहे हैं। साथ ही, घर पर रहकर पूरे दिन खाना खाने की वजह से हम लोगों का पेट निकल रहा है। जिम खुलने के बाद हम लोगों को दोबारा फिट होने में ज्यादा मेहनत लगेगी, लेकिन तब तक घर पर वर्कआउट करते रहें, योग और ब्रीदिंग एक्सरसाइज ज़रूर करें और स्वस्थ रहें।

वर्क फ्रॉम होम से छुट्टी


पहले हम सभी संडे का बेसब्री से इंतज़ार करते थे, जिससे पूरे हफ्ते काम करने के बाद आराम से घर पर रह पाएं, लेकिन अब यह आराम हम लोगों को रास नहीं आ रहा और हम एक बार फिर ऑफिस जाने को इंतज़ार कर रहे हैं। हम लोग फिर से ऑफिस में बैठ कर, चाय/कॉफी पीते हुए, अपने साथ में काम करने वाले लोगों से बात करना और काम करना चाहते हैं। अगर हम सभी नियमों का पालन करते रहेंगे तो यह दिन भी जल्द ही आएगा।

स्कूल/ कॉलेज जाना


शुरूआत में स्कूल/ कॉलेजों के छात्र इस छुट्टी का आनंद ले रहे थे, लेकिन इतने वक्त तक घर पर ऑनलाइन क्लासेस करने के बाद सभी छात्र दोबारा स्कूल/कॉलेज खुलने का इंतज़ार कर रहे हैं। स्कूल या कॉलेज जाकर पढ़ाई करना, कैंटीन में दोस्तों के साथ बैठ कर हँसी-ठिठोली करना, खाना खाना, छात्रों को बहुत याद आ रहा है।

मेट्रो से सफर करना


लखनऊ मेट्रो से यात्रा करना अपने आप में एक सुखद अनुभव होता है, मेट्रो में बैठ कर आरामदायक यात्रा करते हुए, शहर के खूबसूरत नज़ारे को देखना के लिए, हर लखनऊवासी उत्साहित रहता है और हम लोग एक बार फिर से इसी उत्साह के साथ मेट्रो में यात्रा करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

वीकेंड पर नैनीताल और नवाबगंज घूमने जाना


इस समय में कहीं भी जाना खतरों से भरा है, इसलिए हम सभी उस वक्त को याद करते हैं जब हम बिना किसी चीज़ की परवाह किए वीकेंड पर नैनीताल या नवाबगंज घूमने निकल जाते थे। शहर की रोज़मर्रा जिंदगी से दूर कुछ समय अकेले या अपने प्रियजनों के साथ बिताना एक खुशनुमा अनुभव हुआ करता था और हम सभी एक बार फिर से ऐसे ही निश्चिंत होकर जीवन जीने का आनंद लेना चाहते हैं।

मानसून की बारिश में भीगना


कोरोना ने हमें सिखाया है कि कैसे हम लोग छोटी-छोटी खुशियों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं और अब वही पल हमें याद आते हैं। बारिश में भीगना और बाद में चाय-पकौड़ों का आनंद लेना हम सभी के मन को प्रफुल्लित कर देता था, लेकिन अभी केवल इन लम्हों के बारे में सोचकर ही दिल को तसल्ली देनी पड़ती है। इस बार भले ही हम मानसून में भीग न पाएं, लेकिन हम सब के मन में यह उम्मीद है कि आने वाले मानसून में बच्चे फिर से बाहर निकलकर पानी में कागज़ की नाव तैराएंगे और हम सब मिट्टी की सौंधी खुशबू के बीच जी भर कर बारिश में भीगकर मानसून का लुत्फ उठाएंगे।

वीकेंड पर वाटरपार्क जाना


गर्मी की छुट्टियां परिवार के साथ वाटरपार्क जाए बिना अधूरी रही हैं, इसलिए हम बड़ी उत्सुकता से इस महामारी के अंत होने का और वाटरपार्क जाने का इंतज़ार कर रहे हैं।

फिर से त्यौहारों को धूमधाम से मनाना


अब त्यौहार और समारोह निश्चित रूप से अब पहले जैसे नहीं रहे और अब इतने सारे प्रतिबंधों के कारण त्यौहारों की रौनक फीकी पड़ गई है। लेकिन अगर चीजें ठीक और व्यवस्थित तरीके से चलती रहीं, तो हम जल्द ही इस वायरस के अंत का जश्न और सभी उत्सवों को पूरे धूमधाम से मनाएंगे!

नॉक-नॉक

इस महामारी के कारण सभी लोगों ने बहुत सी परेशानियों का सामना किया है, इसलिए हम यही आशा करते हैं कि यह कठिन समय और तकलीफदेह दौर जल्द से जल्द खत्म हो जाए और सभी लोग स्वस्थ रहें। जैसे रात के बाद ही दिन होता है उसी प्रकार जल्द ही यह काली और मुश्किल रात भी खत्म हो जाए और आशा की किरणों से हम सभी के जीवन में रोशनी लौट आए। हमें यही आशा है कि सभी लोग पहले की तरह एक दूसरे से मिल-जुल पाएं, बाहर स्वतंत्र होकर घूम पाएं और निश्चिंत होकर अपनी जिंदगी का आनंद ले पाएं। इसके बाद अब हम लोग शायद जीवन से जुड़ी छोटी-छोटी खुशियों को समझेंगे और उनका लुत्फ उठाएंगे।