कोरोना संक्रमण देश भर के लिए अत्यधिक घातक साबित हुआ है और शायद ही हम लोगों में से कोई ऐसा हो जो इस भयावह परिस्थिति की गिरफ्त में न आया हो। लेकिन कई ऐसे वालंटियर्स और संस्थाएं हैं जो इस समय लोगों के जीवन को आसान बनाने के भरसक प्रयास करते आये हैं। ऐसी ही युवाओं द्वारा चलाई जा रही एक संस्था 'स्वप्ना फाउंडेशन', जो दैनिक मजदूरों, विधवाओं, रिक्शावालों, ठेलेवालों को रोज़ाना की ज़रूरते पूरी करके उनकी इस कठिन परिस्थिति में सहायता कर रहा है ताकि उनको किसी भी तरह की परेशानी न हो।

स्वप्ना का मिशन हैंड्स टुगेदर 2.0


स्वप्ना फाउंडेशन ने पिछले साल कोरोना वायरस संक्रमण की पहली लहर के दौरान अपनी प्रामाणिकता स्थापित की। एनजीओ ने कोरोना महामारी के बीच भोजन, धन, जनशक्ति और आवश्यक चीजों की व्यवस्था की और आज भी अपने नवीनतम एजेंडे, मिशन हैंड्स टुगेदर 2.0 के साथ यह काम जारी है।

यह संस्था लोगों के जीवन में महामारी के कारण पैदा हुई आर्थिक समस्याओं को दूर करने की एक पहल में लगा हुआ है। यह गरीब लोगों को इन कठिन परिस्थितियों में आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने का एक सहयोगात्मक ​प्रयास है। यह पहल ज़रूरतमंद लोगों को कोरोना के इलाज से सम्बंधित आवश्यक सुविधाएं भी प्रदान करने का काम कर रहा है।

इन ज़रूरी सुविधाओं के अलावा स्वप्ना फाउंडेशन के लोग गरीबों को उनके कौशल के अनुसार नौकरी खोजने में मदद करने, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। ये पहल यह सुनिश्चित करेगी की लोग एक सामान्य धनराशि कमा सकें और इस महामारी की स्थिति में अपने परिवार का सहयोग कर सकें। इस सुविधा के लिए इस फाउंडेशन ने लखनऊ में और लखनऊ के आस पास के 21 बस्तियां और 11 गाँव को जोड़ा है। वालंटियर्स यहां जरूरतमंद लोगों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं, चाहे उनकी परेशानी कुछ भी हो।

नॉक नॉक


अपने नाम के मुताबिक़ स्वप्ना फाउंडेशन लोगों को उनके सपनों को साकार करने और उनके जीवन में आशा की किरण लाने के लक्ष्य के साथ काम करता है। यह वर्तमान में 6 कल्याणकारी परियोजनाओं चला रहे हैं, जिसमें शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा से लेकर आजीविका और महिला सशक्तिकरण शामिल हैं, जिससे लखनऊ में 16 बस्तियों और आसपास के 8 गांवों में रहने वाले 1,500 से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।