लखनऊ में हुसैनाबाद एंड एलाइड ट्रस्ट के अधीन हजरतगंज स्थित अवध के पहले बादशाह गाजीउद्दीन हैदर द्वारा वर्ष 1816-1817 में बनवाया गया शाहनजफ इमामबाड़ा कि की जायेगी मरम्मत। यह इमामबाड़ा इराक के नजफ के इमामबाड़े की तर्ज पर बनवाया गया था। यह इमामबाड़ा बेहद ही खराब हालत में है और इसकी बाहरी दीवारों का प्लास्टर उखड़ चूका है।


हाल ही में पिछले दिनों इमामबाड़े की मुख्य इमारत की छत का प्लास्टर भी जर्जर होकर गिर गया था। इमामबाड़े के गुंबद से बारिश का पानी आता है। इससे यहां रखे झाड़-फानूस व अन्य कीमती सामान खराब होने का अंदेशा है। जिसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) और हुसैनाबाद ट्रस्ट ने मौके पर जाकर जांच की थी।


हुसैनाबाद ट्रस्ट की प्रभारी किंशुक श्रीवास्तव ने बताया कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाली इमारत के संरक्षण की जिम्मेदारी को समझते हैं। हमने एएसआई को 3 महीने का समय दिया है इमामबाड़े की मरम्मत का कार्य करने के लिए। इमारत में जो मलबा था, उसे हटाया जा रहा है।


बीते दिनों ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव और प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने इमामबाड़े का निरीक्षण कर इमामबाड़े की बदहाल स्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इमामबाड़े में संरक्षण कार्य जल्द आरम्भ कराने की मांग की थी। वहीं प्रिंसेस फरहाना मालिकी ने भी मुख्यमंत्री और एएसआई से इमामबाड़े का संरक्षण करने की मांग की है।


शाहनजफ इमामबाड़ा, लखनऊ के प्रसिद्ध पर्यटन स्‍थलों में से एक है। इस स्‍मारक को नवाब गाजी- उद- दीन हैदर के द्वारा बनवाया गया था, जो अवध के पाचंवे नवाब थे और 1816-17 में उनके मृत शरीर को यही दफन कर दिया गया था। उनकी इच्‍छा के अनुसार, उनकी तीनों पत्नियों सरफराज़ महल, मुमताज महल और मुबारक महल को उनके साथ इसी इमारत में दफन करवा दिया गया था।