जैसे-जैसे कोरोना संक्रमण ने लखनऊ शहर पर अपना कब्ज़ा जमा लिया वैसे ही शहर के नागरिकों को अनगिनत समस्याओं का सामना करना पड़ा। जिनमें से लॉकडाउन के चलते खाने की समस्या कोरोना संक्रमित लोगों के लिए सबसे चिंताजनक विषय रहा। खाने के लिए शहर की जद्दोजहद को देखकर, दोस्तों के एक समूह ने एक 'सत्कार चैरिटेबल ट्रस्ट नामक संस्था' की शुरुआत की जो लोगों को निःशुल्क खाना बांटने का काम करते हैं।

व्यक्तिगत अनुभव और निःस्वार्थ सेवा भावना से प्रेरित


कोरोना वायरस के साथ अपने निजी अनुभवों के चलते मील टू हील 'Meal to Heal' पहल के विचार को सभी दोस्तों ने फोन पर बातचीत करके एक दूसरे से सांझा किया और एक हफ्ते तक चले विचार विमर्श और लक्षित प्रयासों के बाद यह योजना 8 मई को वास्तविकता में बदल गयी। वर्तमान समय में, सत्कार चैरिटेबल ट्रस्ट प्रतिदिन 100 से अधिक लोगों को खाना प्रदान करके उनकी सेवा कर रहा है। यह समूह आशा करता है की वे इस दैनिक गिनती को बढ़ाकार रोज़ 1000 से अधिक लोगों को भोजन प्रदान करके उनकी सहायता करें।


टीम के अनुसार वे सभी स्वच्छता मानदंडों का पालन करते हैं, और पूरा ध्यान रखते हैं की किसी भी प्रकार की कमी कोई अप्रत्याशित परिस्थिति न खड़ी कर दे। इसके अलावा खाना पकने के स्थान का नियमित रूप से सैनिटाइज़शन होता है और किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन की संभावना को रोकने के लिए सभी काम करने वालों का समय पर टेस्ट होता रहता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कोरोना संक्रमित रोगियों को पौष्टिक भोजन प्रदान करना है जिससे वे जल्द स्वस्थ हो जाएं और इसके साथ इस योजना में शहर के जरूरतमंद वर्गों के लोगों के लिए भोजन का मुफ्त प्रावधान भी शामिल है।

शनिवार को सत्कार चैरिटेबल ट्रस्ट ने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में केंद्रित ड्राइव चलाई जिसमें उन्होंने 130 से अधिक लोगों के लिए लंच पैकेट वितरित करे। इस कार्यक्रम के तहत पैरामेडिक्स और रोगियों के रिश्तेदारों सहित विभिन्न व्यक्तियों को खाना प्रदान किया गया। अपने संकल्प पर खरा उतरते हुए, यह ट्रस्ट भविष्य में इस तरह के और ड्राइव कराने का लक्ष्य में है ताकि इस कठिन समय में लोगों की आवश्यक जरूरतों का ध्यान रखा जा सके।


चैरिटी के चैंपियंस से मिलें


विभिन्न प्रोफेशनल जगहों से आने के बाद ये परोपकारी और संवेदनशील दोस्त इस बात का जीता जागता उदाहरण है की यदि आपके मन में सेवा भाव और दृढ निश्चय हो तो आप समाज के लिए क्या कुछ नहीं कर सकते। अपने अपने निजी संसाधनों और वेतन को इकट्ठा करके शुरू किये गए इस ट्रस्ट में आज प्रमुख संस्थानों से समर्थन आता है। जहां बैंक ऑफ इंडिया ने उनकी पैकेजिंग लागतों को स्पांसर किया है, वहीं बीके ग्रुप लिंक्डइन कनेक्ट के सहयोग से, उनकी डिलीवरी के पैमाने को बढ़ाने में उनकी मदद कर रहा है।


इस समय उनकी सेवाएं आशियाना, एलडीए कॉलोनी, ट्रांसपोर्ट नगर, शारदा नगर, साउथ सिटी, आलमबाग, कृष्णा नगर, गोमती नगर और गोमती नगर एक्सटेंशन के निवासियों द्वारा प्राप्त की जा रही हैं। पिछले 10 दिनों में अपने प्रयासों की सफलता को देखते हुए, ये नेकदिल लोग अधिक से अधिक लोगों के सहायता करने की उम्मीद के साथ अपनी सेवा के दायरे को बढ़ाने की उम्मीद करते हैं।

नॉक नॉक


स्कूल के समय जो दोस्ती के रूप में शुरू हुआ वह अब एक दयालु समूह में बदल गया है। यह संस्था समाज की मदद करने के साथ ही कई युवाओं के लिए प्रेरणा के प्रतीक भी बन गए हैं। उनके प्रयासों की सराहना करते हुए, हम आगे इस तरह की और संवेदनशील कहानियां सुनाने की आशा करते हैं। यदि आप ऐसी किसी पहल के बारे में जानते हैं, तो हमें नीचे कमेंट में बताएं।

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