"मेरे विचार में, आम के बारे में केवल दो आवश्यक बातें हैं - वे मीठे होने चाहिए और वे भरपूर मात्रा में होने चाहिए।" 'फलों के राजा' के बारे में मिर्जा गालिब का यही कहना था और हमारे अनुसार एक भी लखनऊवासी ऐसा नहीं होगा जो इस विचार को ना मानता हो।

फलों के राजा आम के लिए इतना अपार प्रेम आज की बात नहीं है यह प्रेम नवाबों के समय से चला आ रहा है जब लखनऊ से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मलिहाबाद स्वादिष्ट और सुन्दर आमों के एक केंद्र के रूप में विकसित हुआ। हालांकि सदियों से लोगों के मन को खुश करने वाला फलों का राजा 'आम' जिसके आने का इंतज़ार लोग पूरे साल करते हैं इस महामारी के समय में कोरोना कर्फ्यू के चलते सभी आम प्रेमी फलों की बाजार से दूर हो गए हैं और अपने मनपसंद आमों के स्वाद से भी।

देश की मैंगो कैपिटल कोरोना कर्फ्यू से ग्रसित


अनुकूल मौसम की स्थिति के बावजूद भी लंबे समय तक कोरोना कर्फ्यू के कारण मलीहाबाद के आम उत्पादकों को लगातार दूसरे वर्ष नुकसान झेलना पड़ रहा है। हालांकि दशहरी आम आने वाले 10 दिनों में पके और तैयार हो जाएंगे, लेकिन अंतिम दिनों में फसल को जो अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है वह श्रमिकों की कमी से बेहतर तरीके से नहीं हो पायी। हालांकि आम बाजार में मई के अंत तक आने के लिए तैयार हैं लेकिन दशहरी किस्म के आमों के विक्रेताओं को रीसेलर और अन्य खरीदारों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। ये समस्याएं कोरोना कर्फ्यू का नतीजा हैं जिसके कारण लखनऊ और यूपी के जिलों में मूवमेंट प्रतिबंधित है।

क्यूंकि आमों की शेल्फ लाइफ लंबी नहीं होती है इसीलिए संभव है की फल मंडियों के बंद होने से आम प्रेमियों को इस साल दशरी का बेहतरीन स्वाद चखने का मौका न मिल पाए। इसके अलावा, आमों को लंबे समय तक संग्रहीत करने से स्वाद और सुगंध का नुकसान हो सकता है, इसलिए यह विकल्प भी अंत में किसानों के लिए कम मुनाफा ही लेकर आएगा।

आमों की अनेक किस्मों की भूमि


ऐसा माना जाता है कि मलिहाबाद की स्थापना 'अरख वंश' के योद्धाओं के 'राजा मल्हिया' ने की थी हालंकि इसका मूल नाम मल्हियापुर था। इसका वर्तमान नाम उस समय को दर्शाता है जब यह स्थान पठानों का वर्चस्व था, जिन्होंने लखनऊ के नवाबों के संरक्षण में प्रसिद्ध आम के बाग विकसित किए थे।

यूपी के दर्जन भर से अधिक आम की बेल्टों में सबसे अधिक प्रसिद्द मलिहाबाद ने ग्राफ्टिन तकनीकों के इस्तेमाल से 200 साल पुरानी विरासत को संरक्षित किया है। इस पहल के ध्वजवाहक 'पद्म श्री कलीमुल्ला खान' हैं जो एक प्रसिद्ध आम के खेतिहर है, और एक ही पेड़ पर आम की 300 किस्में उगाने के लिए जाने जाते हैं।

इस उपलब्धता के अलावा मलिहाबाद अपनी विश्वप्रसिद्द दशहरी आम की किस्म से जाना जाता है जिसके लिए इस स्थान को सरकार द्वारा भौगोलिक संकेत (GI) टैग भी प्रदान किया गया है। इस क्षेत्र में उगाई जाने वाली अन्य किस्मों की सूची में लखनऊवा सफेदा, चौसा, लंगड़ा और कच्चा मीठा शामिल हैं। 'मैंगो ग्रोअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' के हेड 'इंसराम अली' ने इस शहर की हाई क्वालिटी वाली उपज के कारण मलीहाबाद को भारत की 'मैंगो कैपिटल' के रूप में चिन्हित किया है।

नॉक नॉक


आम, लोगों का इतना पसंदीदा फल है की अक्सर लोग गर्मी के मौसम को आम का मौसम कहकर पुकारते हैं और साल भर इस मौसम का इंतज़ार करते हैं। आइए आशा करते हैं कि कोविड का माहौल जल्द ही नियंत्रण में आ जाए ताकि लखनऊवासियों को आम की मिठास के बिना एक और गर्मी न बितानी पड़े। इसके अलावा, जैसे ही कर्फ्यू प्रतिबंधों में ढील आती है, तो आप मलीहाबाद के प्रसिद्ध आम के बागों की यात्रा का आनंद ले सकते हैं।