लखनऊ चिड़ियाघर यानी नवाब वाजिद शाह अली जूलॉजिकल पार्क (Nawab Wajid Ali Shah Zoological Garden) ने अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश किया है, और इसे चिन्हित करने के लिए 29 नवंबर 2021 को शताब्दी समारोह का आयोजन किया जाएगा। अपने 100 वें जन्मदिन के लिए अग्रिम तैयारी करते हुए, इस चिड़ियाघर में मृत वन्यजीवों की याद में स्मारक बनाई जाएगी। इसका प्रस्ताव लखनऊ चिड़ियाघर प्रशासन द्वारा सरकार को भेजा गया है, जिसमें इसकी स्थापना के लिए संभावित स्थान का भी उल्लेख है।


आगामी स्मारक का मॉडल पहले ही तैयार किया जा चुका है। चिड़ियाघर प्रशासन इस स्मारक के निर्माण के लिए तीन स्थानों, सांप घर तिराहा, कैंटीन के पास का क्षेत्र और राज्य संग्रहालय परिसर में से किसी एक का चयन किया जाएगा। इस स्मारक के अलावा इस अवसर पर अन्य समारोह भी आयोजित किए जाएंगे, जिसकी तैयारियां जोरों पर हैं।

चिड़ियाघर निदेशक ने कहा कि एक स्मारक बनाया जाना है, हालांकि उच्च अधिकारियों ने अभी तक प्रस्ताव पर निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने आगे बताया कि कोरोना संक्रमण के बीच इस संबंध में लिया गया कोई भी निर्णय संभावित आर्थिक चुनौतियों का परिणाम होगा।

लखनऊ चिड़ियाघर का इतिहास


नवाब वाजिद अली शाह चिड़ियाघर की यात्रा तब शुरू हुई जब 1921 में तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स के लखनऊ आगमन के उपलक्ष्य में इसकी स्थापना की गई थी। हार्कोर्ट बटलर (Harcourt Butler) द्वारा इस स्थापना की कल्पना करने से पहले, परिसर में एक आम का बाग था, जिसे बनारसी बाग के नाम से जाना जाता था।

नवाबों के बाद, यह औपनिवेशिक शासन के दौरान अंग्रेजों का पसंदीदा स्थान बन गया और आज, हिंदी सिनेमा में अक्सर यहां दृश्यों को फिल्माया गया है। उमराव जान के इन आंखों की मस्ती जैसे प्रतिष्ठित गीतों को यहां बनी बारादरी (बैठने के लिए एक मंच) पर फिल्माया गया था।